भंडारे में विपक्षियों ने डाला खलल, मारपीट के उपरांत खाद्य पदारथो में डाला डिटेरजेंट पाउडर
वासुदेव यादव
अयोध्या। फ़ैज़ाबाद, श्रीअयाेध्या धाम चाैरासी काेसी परिक्रमा संचालक व धर्मार्थ सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त गया दास ने शासन-प्रशासन से गुहार लगायी है कि प्राचीन काल से चली आ रही 84 काेसी परिक्रमा काे बचाने की। क्योंकि कुछ लाेग परिक्रमा में व्यवधान उत्पन्न करने की काेशिश कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह परिक्रमा बाधित हाे सकती है। बुधवार काे सीताकुण्ड पर मीडिया से मुखातिब होते हुए कहाकि चाैरासी काेसी परिक्रमा परिक्रमा में कुछ लाेगाें के द्वारा व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है। इन लाेगाें काे बड़ी छावनी के महन्त जगदीश दास का सह मिल रहा है। परिक्रमा संचालक ने कहाकि जब कल मंगलवार काे सभी परिक्रमार्थी रामकाेट की परिक्रमा कर सीताकुण्ड पर आए। ताे वहां परिक्रमार्थियाें के लिए भाेजन की व्यवस्था की गई थी। तभी उस जगह पर आेंकार दास कथित चेला चन्द्रमा दास आ धमके और हमारे साथ आए हुए परिक्रमार्थियाें काे धमका कर बरगलाने की काेशिश करने लगे।
यहां तक कि श्रद्धालुओं काे हमारे प्रति भड़काने की काेशिश की। फिर भी परिक्रमार्थी उसकी बाताें में नही आए और हमारे साथ जुड़े रहे। अपने मंसूबाें में कामयाब न हाेता देखकर ओंकार दास ने बने हुए भाेजन में निरमा पाउडर डाल दिया, जिसका मैंने कड़ा विराेध किया। ताे ओंकार दास ने सभी परिक्रमार्थियाें के सामने मुझे डण्डा लेकर मारने दाैड़ा लिया तथा मारा-पीटा। इसके गवाह सभी परिक्रमार्थी हैं। महन्त गया दास ने कहाकि मैंने इस सम्बन्ध में तहरीर अयाेध्या काेतवाली में दे दी है। लेकिन प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए है। वह इस मामले में काेई कार्रवाई नही कर रहा है। हमारे ऊपर बराबर अाेंकार दास से खतरा बना हुआ है। मैंने सीओ अयाेध्या काे भी इस मामले से अवगत करा दिया है। महन्त ने कहाकि अाेंकार दास ने इससे पहले भी चाैरासी काेसी परिक्रमा में जगह-जगह व्यवधान उत्पन्न किया था, जिसके कारण उन्हें सन- 2010 में परिक्रमा में न शामिल हाेने के लिए प्रशासन की तरफ से पाबन्द किया गया था। यही हाल 2018 की परिक्रमा में भी किया गया। लेकिन उसके बावजूद वह परिक्रमा में शामिल हुए तथा व्यवधान उत्पन्न किया। अब सारा दाराेमदार प्रशासन के हाथ में है। वही अब चाैरासी काेसी परिक्रमा काे बचा सकता है, जिससे आगे भी परिक्रमा सुचारू रूप से चलती रहे।


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