खुर्शीद खान
सुलतानपुर (यूपी). कुशीनगर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद समूचे प्रदेश में हाहाकार हुआ लेकिन हादसे के 48 घंटे बाद लोग ज़िंदगी की कद्र समझे बग़ैर ज़िंदगी जीते दिखाई दिये। रियलिटी चेक में मानव रहित क्रासिंग से जान हथेली पर रख लोग गुजरते रहे। हद तो तब हो गई के हादसों के बाद जागने वाला रेलवे महकमा सोता ही रहा।
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जान हथेली पर रखकर रोज़ पार करते हैं रेलवे ट्रैक
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कैमरे में कैद हुई ये तस्वीरें लखनऊ-वाराणसी रेलवे ट्रैक पर स्थित ज़िले के सुरजीपुर गांव की हैं। उक्त गांव नेशनल हाईवे 56 से भी सटा हुआ है। इस कारण रेलवे ट्रैक को बिना पार किये ग्रामीण अपनी रोज़ की जिंदगी नहीं जी सकते हैं,
स्कूली बच्चों का इसी ट्रैक से रोज़ का आना-जाना है। आप तस्वीरों में ये भी साफ़ देख सकते हैं कि ग्रामीण किस तरह से अपने बेजुबान जानवरों व खुद की जान को हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक को पार करते हैं।
बावजूद इन समस्याओं को न रेल प्रशासन सुनने वाला है और न ही जिला प्रशासन।
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23 नवम्बर 2017 को बोलेरो जीप की मैमो ट्रेन से हुई थी टक्कर, 4 बरातियों की ऑन द स्पॉट हुई थी मौत
स्टेशन सुपरिटेंडेंट एल. एल. मीना ने पूछे जानें पर बताया कि लखनऊ-वाराणसी रेल ट्रैक पर उतरठिया जंक्शन से जफराबाद जंक्शन तक 47 मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं।
वहीं इलाहाबाद-फैजाबाद रेल ट्रैक पर पीपरपुर से भरतकुंड तक 4 मानव रहित क्रासिंग हैं।
पिछले वर्ष 2017 में 23 नवम्बर को लखनऊ-वाराणसी रेल ट्रैक पर स्थित मुसाफिरखाना स्टेशन के मथा भुसंडा में मानव रहित रेलवे क्रासिंग संख्या 110 पर लखनऊ से सुलतानपुर आ रही मैमो ट्रेन ने बारात लेकर जा रही बोलेरो जीप को टक्कर मार दिया था
इस हादसे में बोलेरो सवार 4 बरातियों की ऑन ड स्पॉट मौत हो गई, जबकि दो घायल हुए थे।
वहीं इसी रेल ट्रैक पर साल 2013 और फिर उसके बाद 2014 में बेदूपारा में दो बड़ी दुर्घटनाएं हुईं थीं जिनमें दर्जन भर लोगों की मौतें हुईं हैं।


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