अमरजीत सिंह
फैज़ाबाद:मवई थाना क्षेत्र के संडवा गांव के लोग दो दशक बाद भी जहरीली शराब के दंश को भूल नही पा रहे है।जहरीली शराब पीने के बाद मौत से टूट चुके परिवार के लोग अभी तक उबर नही पाए है।वर्ष 1997 में होली के त्योहार पर घटी इस घटना में जहाँ तीन लोग संडवा गांव के मर गए थे तो वही इस कच्ची शराब के पीने से तीन रिस्तेदारो की भी मौत हो गई थी।इसी घटना में मरे भाई लाल रावत के पुत्र रामपाल बताते हैं कि घटना के समय वह महज 7 साल के थे।पिता की मौत के बाद पूरा परिवार टूट सा गया था।किसी तरह मेरी माता फुलेसरा जी ने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया।लेकिन घर की माली हालत से हम आज तक उबर नही पाए।रामपाल बताते है कि वे ट्रैक्टर की ड्राइवरी करके परिवार का पालन पोषण करते है।इसी गांव के श्रीचंद की भी मौत उसी घटना में हुई थी।इनके पुत्र कल्लू की भी स्थित अच्छी नही है।आये दिन कल्लू की तबियत खराब रहती हैं।श्रीचंद की पत्नी गीता देवी बताती है कि घटना के वक्त एक मात्र लड़का कल्लू केवल 6 माह का ही था।परिवार अभी तक इस दर्दनाक हादसे से उबर नही पाया है।इसी घटना में गांव की ही एक महिला छुम्मुक देई की भी मौत हुई थी।घटना में त्योहार मनाने आए रिस्तेदार पुद्दन जो शुक्लबजार जिला अमेठी के निवासी थे और रामप्रीत लोहटी सरैया गांव के रहने वाले थे।जानकारी की गई तो पता चला कि इनके परिवार की भी स्थित दयनीय है।घटना से आहत मृतक भाई लाल रावत के पुत्र रामपाल और श्रीचंद के पुत्र कल्लू ने बताया कि वे कभी शराब न पीने की शपथ ले चुके है।और अपनो को कभी भी शराब न पीने की कसम दिलाते हैं।उन्होंने बताया कि अपने रिस्तेदारो ,दोस्तो में अब तक करीब दो दर्जन लोगों की शराब की लत को छोडवा चुके है


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