सुनील उपाध्याय
बस्ती यूपी । संगीत मनुष्य को अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। संगीत के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है। उक्त विचार प्रेस क्लब में पं0 ज्वाला प्रसाद संगीत सेवा संस्थान द्वारा आयेाजित आठ दिवसीय ग्रीष्म कालीन संगीत कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान संगीत शिक्षक राजेश आर्य ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मनुष्य के जीवन में संगीत का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाता है और अध्यात्मिक पृष्ठभूमि तैयार करता है। साथ ही हमारी संस्कृति को भी जागृत करता है।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए पं0 ज्वाला प्रसाद संगीत सेवा संस्थान की शिक्षिका कु0 ज्योति ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय सभ्यता एवं संस्कति की धरोहर है। इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता है। कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से क्षेत्रीय जनों में शास्त्रीय संगीत के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जायेगा।
पं0 ज्वाला प्रसाद संगीत सेवा संस्थान के प्रबन्घक विनोद कुमार उपाध्याय, कामिनी पाण्डेय एवं संतोष श्रीवास्तव ने शास्त्रीय संगीत की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शास्त्रीय संगीत संगीत की आत्मा है। प्रबन्धक विनोद कुमार उपाध्याय ने बताया कि यह कार्यशाला 13 जून तक चलेगी। कार्यशाला में भजन, पारम्परिक गीत, सहित अनेक विधाओं का ज्ञान दिया जा रहा है।
इस अवसर पर रवि प्रसाद, अनमोल, शांति आदित्य, संध्या पाण्डेय, धनुषधारी पाण्डेय, विपिन यादव, मन्दाकिनी सिंह, सविता पाण्डेय, संचिता, प्रतिभा, श्रद्धा, एवं यन्त्र वादक शाहबान और आर्यन उपस्थित रहे।


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