अमरजीत सिंह
फैज़ाबाद:रुद्राभिषेक के माध्यम से याचक शिव को प्रसन्न करके उनसे मनचाहा वरदान पा सकता हैं क्योंकि रुद्राभिषेक शिव को बहुत प्रिय है।पुरुषोत्तम मास में रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है।अलग अलग वस्तुओं और तिथियों पर रुद्राभिषेक करने का अलग फल प्राप्त होता है।ये बात गौरैया देव मंदिर के संत सीता राम दास ने रुद्राभिषेक पूजन कराते समय कही मुख्य यजमान मोहली निवासी सत्य प्रकाश सिंह सहित वहां उपस्थिति सभी श्रद्धालुओं को बताई।इन्होंने बताया कि विद्वानों का मत है रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित किया जाता है व शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ किया जाता है, सावन मास के अलावा पुरुषोत्तम मास में भी रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है।रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।तथा रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर करने का सबसे उत्तम उपाय है।रुद्राभिषेक में मनोकामना के अनुसार अलग-अलग वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है।जिस वस्तु से रुद्राभिषेक करते हैं उससे जुड़ी मनोकामना ही पूरी होती है जैसे घी की धारा से अभिषेक करने से वंश बढ़ता है।इक्षुरस से अभिषेक करने से दुर्योग नष्ट होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से मनुष्य विद्वान हो जाता है, शहद से अभिषेक करने से पुरानी बीमारियां नष्ट हो जाती हैं, गाय के दूध से अभिषेक करने से आरोग्य मिलता है, शक्कर मिले जल से अभिषेक करने से संतान प्राप्ति सरल हो जाती हैं तथा भस्म से अभिषेक करने से मुक्ति अर्थात मोक्ष की प्राप्ति होती है।जब मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक करना हो तो शिववास को अवश्य देखना चाहिये।जैसे हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी को शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं।हर महीने कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या को भी शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं।कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर वास करते हैं।इसी तरह शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भी महादेव कैलाश पर ही रहते हैं।कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिव जी नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं।शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तिथि को भी शिव जी विश्व भ्रमण पर होते हैं।रुद्राभिषेक के लिए उक्त तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है


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