अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर।। जननायक महाराणा प्रताप के वंशज कही जाने वाली थारू जनजाति वर्तमान समय में जीवन यापन करने के लिए संर्घष कर रही है। वर्षो से जिस जमीन पर उनके पूर्वज खेती कर अपना व अपने परिवार का जीवन यापन करते आए है आज उसी जमीन के लिए थारू जनजाति सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रह है। पूरे मामले में एडीएम अरूण कुमार शुक्ल ने बताया कि शासन को पत्र लिखा गया है जैसा निर्देश आएगा अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार पचपेड़वा विकास खंड के बेतहनिया गांव में महाराणा प्रताप के वंशज कहे जाने वाले थारू जनजाति वर्षो से रहते आ रहे है। जिस जमीन पर उनके पूर्वजों ने वर्षो खेती की वह जमीन आज सरकार द्वारा अधिग्रहण की जा रही है। जिससे थारू जनजाति के लोगों को हो सकता है भुखमरी का सामना करना पड़े। अपनी जमीन बचाने व जीवन यापन के लिए थारू जनजाति महीनों से सरकारी विभागों का चक्कर काट रहे है लेकिन उन्हें कही से राहत नही मिल रही है। ग्राम बेतहनिया के निकट ही एक बांध का निर्माण हो रहा है जिस कारण से सरकारी भूमि को चिन्हित कर भूमि अधिग्रहण किया गया। वहीं शेष बची जमीन को एंटी भू माफिया अधिनियम पारित होने के बाद वन विभाग ने अपनी जमीन की पैमाईश कर अधिगृहित कर ली है। जिससे थारू जनजाति के पास खेती के लिए भूमि ही नही बची।
कैबिनेट मंत्री का किया था घेराव
अपनी मांगों को लेकर थारू जनजाति के लोगों ने 16 जून को महाराणा प्रताप की जयंती समारोह में आए कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री का घेराव किया था। जिसपर कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री व उनके साथ मौजूद जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा ने उक्त समस्या के लिए डीएम से वार्ता कर शासन को इस समस्या से अवगत कराने की बात कही थी। जिला प्रशासन ने थारू जनजाति की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए फिलहाल उक्त भूमि पर खेती करने की अनुमति दे दी है। एडीएम अरूण कुमार शुक्ल ने बताया कि शासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। यह विधिक मामला है। जबतक ऊपर से कोई निर्देश नहीं आता है तब तक यथा स्थिति बनाए रखने की अनुमति दी गई है। वहीं थारू जनजाति के लोगों को थोड़ी राहत मिलने से उम्मीद की एक नई किरण जगी है।


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