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गोण्डा में कैसे रुकेगी सरकारी अनाजों की काला बाजारी खड़ाऊ राज का जलवा कायम



गोण्डा। जिले में 2004 के पूर्व से अनाज घोटाले की जो परिपाटी चली है, अब भी जारी है। सरकारे बदलने के बाद माफियाओं को संरक्षण देने वालों का पार्टी और मुखौटा केवल बदला है लेकिन काला बाजारी बन्द न हो कर तरीके बदल जा रहे है।


पहले सपा के लोगों पर माहवारी लेकर माफियाओं के संरक्षण देने का आरोप लगता था और भाजपा के लोगों पर आरोप लग रहा है। अब तो साजिशन भी शिकायत कर कोटेदारों का कोटा निरस्त और बहाल कराया जा रहा है। हालांकि यह सारा खेल पुलिस एवं जिला प्रशासन जान चुका है, लेकिन कुर्सी बरकरार रखने के चक्कर में अधिकारी माफियाओं पर हाथ नही डाल रहा है। जिसका परिणाम भी पूर्व अधिकारी देख चुके है।



 वसूली और संरक्षण के लिए नया खेल
कोटेदारों को चंगुल में लाने के लिए कुछ जनप्रतिनिधियों एवं जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि पहले कोटेदारों से माहवारी का प्रस्ताव रखते, जिसमें सफल न होने पर शिकायत शुरू कर देते है और अगल बगल के कोटेदारों से सौदा तय करते कि यदि आपके यहाँ अमुक गांव का कोटा अटैच करा दिया जाय तो इतना माहवारी देना पड़ेगा और फिर कोटे की शिकायत कर निलम्बित कराकर व बिना निलम्बन के बगल के कोटे से अटैच कराकर अपना उल्लू सीधा कर रहे है। यह बात भी नही है कि कोटेदार हरिश्चन्द्र है। उन्हें और बेइमानी करने के लिए उत्साहित और संरक्षण दिया जाता है।



जनप्रतिनिधि के भी प्रतिनिधि बन कर काट रहे माल
जिले में खड़ाऊ राज चल रहा है। खड़ाऊ राज का मतलब होता है प्रधान, प्रमुा कोई दूसरा और उसके प्रतिनिधि व मौखिक में प्रतिनिधि ही अपने को ब्लाक प्रमुख और प्रधान कहलवाते है। विकास खण्डों में ब्लाक प्रमुखों की कुर्सी पर बैठकर बैठक करते और निर्णय लेते, लेकिन हस्ताक्षर असली वाले प्रधान व प्रमुख का स्वयं बना देते या किसी से बनवाते या फिर असली वाले से
हस्ताक्षर बनवा लेते है। ऐसे में कोई घोटाला होता है तो असली वाला ही जेल जायेगा। पूर्व में ऐसा हो भी चुका है।



 प्रतिनिधि के प्रतिनिधि ही काटते है माल
ऐसे प्रतिनिधि अपना जलवा कायम रखने के लिए सत्ता पक्ष के विधायक सांसद से मधुर सम्बन्ध कायम रखते है और इनके आगे पीछे रह कर चापलूसी करते है जिससे विधायक सांसद की कृपा इन पर बनी रही है। यदि खण्ड विकास अधिकारी सिक्रेटरी, लेखपाल व अधिकारी किसी कार्य में नियमतः करने में कोई अड़चन पैदा करता है तो प्रतिनिधि के प्रतिनिधि अपने आका विधायक सांसद व उनके प्रतिनिधि से फोन कराते या बात करवाते या फिर पैड पर सिफारिश करवा देते है।



सांसद विधायक को भी रहना पड़ेगा सचेत
सत्ता पक्ष के सांसद विधायक को भी सजग रहना पड़ेगा कि उनके नाम पर उनके प्रतिनिधि अन्य प्रतिनिधि कहीं उनके नामों का गलत उपयोग तो नही कर रहे है। यह सम्भव भी है कि अधिकांश कोटेदार व दण्डित किये गये लोग ऐसे लोगों
का सहारा लेकर गलत सिफारिस कराकर स्वयं माला माल हो रहे हैं।
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