गोण्डा: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार दलितों व गरीबों के लिए अखबारों व टीवी में सहायता की गंगा बहा रही है लेकिन मनकापुर तहसील प्रशासन योगी राज में भी निरंकुंश बना है जिससे पीडिता को न्याय के लिए आमरण अनसन का सहारा लेना पड़ रहा है
बताते चले कि मनकापुर तहसील क्षेत्र छपिया ब्लाक के ग्राम तिरखा बुर्जग निवासी धनेश्वर की बुर्जुग मां की बीते कुछ माह पूर्व फूस के मकान मे आग लग जाने से मौत हो गयी थी।उस समय परिजन खेत में काम करने गये हुए थे।अचानक अज्ञात कारण से आग लग गयी थी और वृद्धि मां आग के चपेट में आ गयी। मामले में पीड़ित धनेश्वर ने तत्कालीन जिलाधिकारी गोण्डा से समूचे प्रकरण की जांच कर किसान बीमा सहायता दिलाये जाने की मांग की थी। जाँच तत्कालीन डीएम ने उपजिलाधिकारी मनकापुर वीके प्रसाद को सौपी और एसडीएम ने उक्त जांच नयाब तहसीलदार मदन मोहन गुप्ता से करायी। जांच में पट्टीदारो के बयान के आधार नयाब तहसीलदार द्वारा वृद्धि की मौत को आत्महत्या दर्शाते हुए किसान बीमा सहायता न दिलाये जाने की रिर्पोट एसडीएम को सौप दी। अनसनकारी दम्पत्ति उक्त रिर्पोट पट्टीदारो व विरोधियो के दवाब लगाये जाने का अरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच व किसान बीमा सहायता दिलाये जाने को लेकर गुरुवार से एसडीएम कार्यालय के समक्ष पति-पत्नी आमरण-अनशन जारी कर दिया है।
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पीडिता ने नायब पर लगाये गंभीर आरोप
विरोधी नायब तहसीलदार से मिलकर सभी कागजों को दबाते रहे | न्याय पाने की आस में पीडिता ने थक हार कर अमरण अनशन का नोटिस दे दिया नोटिस मिलते ही आरोपी नायब तहसीलदार बभनीपायर ने पीडिता के गांव पहुंच कर उसे डराया धमकाया कि तुम नोटिस वापस ले लो मै डाकबंगले पर रहता हूं वहां आकर मुझसे मिलो नहीं तो तुम्हारे ऊपर मुकदमा लिखवा कर पकडवा लूंगा |
मामले में तहसीलदार वृज मोहन ने बताया कि जांच दूसरे को सौपी गयी है और महिला के साथ अन्याय नही होगा।



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