शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़। जिले के लालगंज कोतवाली क्षेत्र के पूरे अनिरूद्ध गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के निर्माणाधीन गेट की एक दीवार अचानक ढहने से सात वर्षीय छात्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं दुर्घटना मे दो अन्य स्कूली छात्रो को भी चोटे आयी है। रामपुर संग्रामगढ़ विकासखण्ड के प्राथमिक विद्यालय पूरे अनिरूद्ध मे हाल ही मे ग्राम पंचायत द्वारा स्कूल के गेट का निर्माण कराया गया था। बुधवार की सुबह विद्यालय मे नियमित रूप से छात्र पढ़ने आये। सुबह करीब साढ़े नौ बजे विद्यालय के कुछ बच्चे निर्माणाधीन गेट के पास खेल रहे थे। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चो के गेट पर झूला झूलते समय अचानक एक दीवार भरभराकर ढह गई।
दीवार ढहने से गांव के बब्बू सरोज का राज (07) के सिर पर एक पत्थर आ गिरा। इससे गंभीर रूप से चुटहिल राज की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक छात्र राज कक्षा दो का छात्र था।
वहीं दुर्घटना मे गांव के बडे लाल का पुत्र अमन आठ जिसे कक्षा तीन का छात्र बताया जाता है को भी मामूली चोटें आयी है। और तो और स्कूल के हेड मास्टर राजेश यादव के पुत्र आर्यन जो इसी विद्यालय मे कक्षा दो का छात्र है को भी हल्की चोट आ गई। हालांकि इन दोनो घायल छात्रो का गांव मे ही भटनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आये चिकित्सक ने इलाज किया। स्कूल के गेट ढहने से छात्र की मौत की जानकारी होते ही जिले एवं स्थानीय प्रशासन मे हडकम्प मच गया। डीएम के निर्देश पर आननफानन मे एसडीएम महेंद्र सिंह तथा बीएसए अशोक कुमार सिंह व कोतवाल अंगदराय घटनास्थल पर पहुंच गये। इधर बीडीओ रामपुरसंग्रामगढ ओपी मिश्रा तथा बीईओ रिजवान अहमद भी घटनास्थल पर आ पहुंचे। दुर्घटना मे मासूम दलित छात्र की मौत की जानकारी होते ही परिजन शव से लिपटकर रोने बिलखने लगे। परिजनो ने मृतक छात्र के शव का पीएम कराने से भी शुरू मे साफ मनाही कर दी। इससे प्रशासनिक अफसरो के हाथ पांव फूल उठे। इसी बीच सूचना मिलने पर पूर्व प्रमुख एवं जिला पंचायत सदस्य पुष्पा देवी तथा कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ल एवं क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना के प्रतिनिधि आशीष उपाध्याय भी मौके पर आ पहुंचे। पूर्व प्रमुख पुष्पा देवी आदि के परिजनो व गांव वालो को समझाने बुझाने पर करीब चार घंटे बाद परिजन शव को पीएम कराने के लिये राजी हो सके। इसके बाद लालगंज कोतवाल अंगदराय ने एसडीएम की उपस्थिति मे शव का पंचनामा कराकर पीएम के लिये जिला मुख्यालय भेजवाया। मृतक छात्र राज बब्बू सरोज का इकलौता पुत्र था। जबकि वह अपने पीछे तीन मासूम बहन छोड गया है। इधर घटना की गंभीरता को लेकर मौके पर पहुंचे एसडीएम महेंद्र सिंह ने बीएसए अशोक कुमार को विभागीय जांच कराये जाने को कहा है। एसडीएम ने निर्माण की गुणवत्ता के साथ दुर्घटना के कारणो के तथ्यो की गंभीरता से पडताल कर दोषियो के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही है। वहीं दुर्घटना मे छात्र की मौत की जानकारी होने पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने गहरी वेदना प्रकट करते हुये जिला प्रशासन से पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच कराये जाने को कहा है। क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना ने भी घटना को अत्यन्त पीडादायक ठहराते हुये मृतक छात्र के परिजनो के प्रति संवेदना प्रकट की है।
![]() |
| दुर्घटना मे मृत मासूम छात्र के शव के पास बिलखती महिलायें |
![]() |
| मृतक छात्र राज |
बेसिक शिक्षा विभाग के प्रबंधन की खुली पोल
जिले के रामपुर संग्रामगढ़ विकासखण्ड के प्राथमिक विद्यालय पूरे अनिरूद्ध मे निर्माणाधीन गेट के ढहने से छात्र की मौत को लेकर निर्माण सामग्री मे अनियमितता साफ उजागर हो उठी है। प्रत्यक्षदर्शियो के बीच यह चर्चा आम रही कि निर्माण कार्य मे न तो समुचित मात्रा मे सीमेण्ट का प्रयोग किया गया और न ही दीवार के निर्माण मे सरिया का इस्तेमाल किया गया। एक तरफ की दीवार तो तीन फिट निर्मित नजर आई वहीं दुर्घटना की तरफ दीवार का मात्र एक फिट होना हृदयविदारक हादसे को दे गया। सरकारी स्कूल की दीवार ढहने से मासूम छात्र की मौत की जानकारी होते ही प्रशासनिक तंत्र मे अफरातफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौज्ूाद अफसर जहां छात्र की मौत को लगातार हादसा करार देते रहे। वहीं बीएसए से लेकर बीडीओ तक निर्माण कार्य को लेकर साफगोई की मुद्रा मे अपना अपना पल्ला झाडते दिखे। अफसर गांव के प्रधान लालजी सरोज पर स्वयं स्कूल के गेट के निर्माण को लेकर ठीकरा फोडने मे मशगूल दिखे। जबकि प्रधान लालजी का साफ कहना था कि निर्माण कार्य की जानकारी हेडमास्टर से लेकर ब्लाक के कार्यदायी संस्था के जेई तक को बराबर थी। यहां सवाल यह उठता है कि यदि ग्राम प्रधान सरकारी स्कूल के गेट का निर्माण करा रहे थे तो हेडमास्टर के द्वारा इसकी सूचना बीईओ को आखिर क्यों नहीं दी गई होगी और ऐसे मे बीईओ के द्वारा स्कूलो के निरीक्षण मे यदि गेट निर्माण मे घटिया सामग्री का प्रयोग हो रहा था तो इसे लेकर खुद के स्तर से कार्रवाई क्यों नही की गई। दूसरा सवाल ब्लाक की तरफ भी उठ रहा है। ब्लाक की कार्यदायी संस्था के अवर अभियंता का कहना है कि इस निर्माण कार्य को लेकर अभी तक कोई वित्तीय स्वीकृति नही दी गई है और न ही निर्माण कार्य के बाबत विभाग द्वारा कोई टेण्डर ही निर्गत किया गया है। यहां काला और कडुवा सच तो यह है कि प्रायः ब्लाक की कार्यदायी संस्थाओ द्वारा ग्राम पंचायतो के विकास से जुडे निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाते है और इसके टेण्डर की औपचारिकता भी लुकछिपकर देर सबेर कर ली जाती है। निर्माण कार्य की जानकारी भी सबको हुआ करती है किंतु ऐसे बडे हादसो के अकस्मात सामने आने के बाद अपनी गर्दन बचाने के लिये कानूनी बचत के ढाल बना लिये जाते है। जबकि कमीशन की काली हांडी मे हर कोई पहले से ही अपना हाथ गीला किये हुआ होता है।




एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ