सुनील उपाध्याय
बस्ती । समग्र सामाजिक क्रांति के अग्रदूत छत्रपति शाहूजी महाराज को उनके जयन्ती अवसर पर रविवार को सरदार पटेल स्मारक संस्थान द्वारा याद किया गया। संस्थान सभागार में स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज के प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुये वक्ताओं ने उनके योगदान को रेखांकित किया।
अध्यक्ष प्रेमनाथ चौधरी ने शाहूजी महाराज के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुये कहा कि उन्होंने दलित और शोषित वर्ग के दुख दर्द को बहुत करीब से समझा और उनसे निकटता बनाकर उनके मान-सम्मान को ऊपर उठाया । अपने राज्य की गैरबराबरी की व्यवस्था को खत्म करने के लिए देश में पहली बार अपने राज्य में पिछड़ों के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की। शोषित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था की। गरीब छात्रों के लिए छात्रावास स्थापित किये। साहू जी महाराज के शासन के दौरान बाल विवाह पर ईमानदारी से प्रतिबंध लगाया गया।
संस्थान के महामंत्री डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज ने पिछड़ी जातियों समेत समाज के सभी वर्गों के लिए अलग-अलग सरकारी संस्थाएं खोलने की पहल की। यह अनूठी पहल थी उन जातियों को शिक्षित करने के लिए, जो सदियों से उपेक्षित थीं, इस पहल में दलित-पिछड़ी जातियों के बच्चों की शिक्षा के लिए खास प्रयास किये गए थे। वंचित और गरीब घरों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। शाहूजी महाराज के प्रयासों का परिणाम उनके शासन में ही दिखने लग गया था। शाहूजी महाराज ने जब देखा कि अछूत-पिछड़ी जाति के छात्रों की राज्य के स्कूल-कॉलेजों में पर्याप्त संख्या हैं, तब उन्होंने वंचितों के लिए खुलवाये गए पृथक स्कूल और छात्रावासों को बंद करवा दिया और उन्हें सामान्य छात्रों के साथ ही पढ़ने की सुविधा प्रदान की। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा।
इसी क्रम में संस्थान की त्रैमासिक बैठक सम्पन्न हुई जिसमें सरदार पटेल स्मारक संस्थान के विकास और पटेल छात्रावास को और अधिक सुविधा सम्पन्न बनाने पर विचार कर निर्णय लिये गये। कार्यक्रम में शिवशरन चौधरी, हरीराम चौधरी, प्रेम चन्द्र वर्मा उर्फ पोरस, आर.के. सिंह पटेल, धर्मदेव चौधरी, विजय कुमार पटेल, इं. राजेन्द्र प्रसाद चौधरी, प्रकाश चौधरी, धु्रवचन्द्र चौधरी, झिनकान चौधरी, अद्याशरण चौधरी, दुर्गेश चौधरी, रामलाल चौधरी, हरीराम, सोहनलाल आदि उपस्थित रहे।


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