Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

दिनदहाड़े की गई निर्मम हत्या से दहशत




अखिलेश्वर तिवारी 
------------------------------------------

सूचना पर नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस तथा डायल हंड्रेड पुलिस 
प्रशासनिक उदासीनता के चलते हुई मौत
बलरामपुर : तुलसीपुर थाना क्षेत्र के गांव जगदीशपुर में आज दिनदहाड़े एक व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी गई । घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है । घटनास्थल पर घायल घंटों पड़ा रहा परंतु सूचना पर 108 एंबुलेंस तथा डायल हंड्रेड की पुलिस नहीं पहुंची । दरअसल शोभाराम यादव, (53) को उसी गाँव के ही जय बहादुर मिश्रा ने गन्ने का खेत चराने जैसी छोटी सी बात पर हंसिए से चार वार करके गंभीर रूप से घायल कर दिया। जब इस बात की सूचना ग्रामीणों को मिली तो वहां पर तत्काल 108 नंबर और 100 नंबर लोगों ने डायल करना शुरू किया लेकिन दोनों का ही रिस्पांस ना मिलने के कारण व्यक्ति घटनास्थल पर ही 2 घंटे तक तड़पता रहा। इसके बाद कुछ लोगों ने वहां के क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य संतोष यादव को बुलाया, जिन्होंने अपनी गाड़ी पर घायल को लादकर तुलसीपुर सीएचसी में भर्ती करवाया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल शोभाराम को को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
मृतक के परिजन    

                                                                           

ग्रामीणों ने बताया कि मृतक शोभाराम यादव अपने खेत से खाद डाल कर लौट रहा था, तभी आरोपी जय बहादुर मिश्रा और उसके भाई केदारनाथ मिश्रा से उनका गन्ने की खेत चराने पर बहस होने लगी। यह बहस इतनी बढ़ गई कि जय बहादुर ने अपना आपा खो दिया। जय बहादुर ने पहले तो लाठी से वार करना चाहा लेकिन उसके भाई केदारनाथ ने पकड़ लिया, जिसके बाद उसने हाथ मे लिए हंसिए से उस पर तीन वार किया, जिसमें शोभाराम बुरी तरह से घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि वार के बाद शोभाराम की आंत और गुर्दा बाहर आ गया था। प्रत्यक्षदर्शी चमेली देवी बताती हैं कि वह खेत की तरफ जा रही थी, तभी इन दोनों लोगों का झगड़ा शुरु हुआ। इसके बाद झगड़ा अचानक इतना बढ़ गया कि जय बहादुर ने अपना आपा खोते हुए हंसिया से कई वार करके उसे घायल कर दिया, जिसमें उसकी आंत तक बाहर निकल आई थी । एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि जय बहादुर पहले से ही बहुत अच्छा आदमी नहीं है. उसने गांव में पहले भी तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा लोगों को मारपीट करके घायल किया है। कुछ की तो शिकायत थाने तक पहुंची लेकिन बाद में उसने सुलह कर लिया लेकिन इस बार की बात जान लेने तक जा पहुंची।








दर असल शोभाराम की जान बच सकती थी अगर पुलिस की वैन और एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती। एक सिपाही ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हमारे अधिकारी ने हमें सूचना ही लगभग 11 बज के 45 मिनट पर दी। 










 तब तक शोभाराम घायल  अवस्था में घटनास्थल पर ही पड़ा था। जबकि गांव वाले बताते हैं की हमने घटना होने के 20 मिनट के भीतर ही एंबुलेंस और पुलिस विभाग दोनों को सूचना दे दी थी, जिस पर एंबुलेंस संचालक ने हमसे बताया कि के अभी कोई वाहन खाली नहीं है जैसे ही खाली होगी हम तत्काल सेवा भेजेंगे । कुल मिलाकर लोगों का मानना है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते ही  शोभाराम की जान  गई है और इस घटना के बाद से  प्रशासन की लचर व्यवस्था  पर लोगों को आक्रोश भी है ।






















 शोभराम की कुल 7 संतान हैं, जिनमें से तीन नाबालिग हैं। दो बेटे अभी मुंबई में रहकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं तो कुछ अभी पढ़ाई कर रहे हैं।
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे