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जयन्ती पर याद किये गये आलोचना सम्राट आचार्य रामचन्द्र शुक्ल












सुनील उपाध्याय 
बस्ती । हिन्दी आलोचना सम्राट जनपद के अगौना में जन्में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के 134 वीं जयन्ती पर उन्होने याद किया गया। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा नगर अध्यक्ष अनिल कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आचार्य शुक्ल के मड़वानगर के बड़ेबन में स्थित प्रतिमा पर स्वच्छता अभियान चलाकर माल्यार्पण के साथ उन्हें नमन् किया गया। उपस्थित जनों ने कहा कि आचार्य शुक्ल की प्रतिमा  की प्रमुख स्थान पर स्थापित किया जाय इसके लिये सदर विधायक दयाराम चौधरी और नगर पालिका अध्यक्ष से आग्रह किया जायेगा। 
किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजीत चौबे ने कहा कि  आचार्य  रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी समालोचना के शिखर है और आज भी वे अनेक पाठ्यक्रमों में पढाये जाने के साथ ही जनपद के गौरव है। उनकी प्रतिमा की उपेक्षा नितान्त चिन्ताजनक है। 
समाजसेवी अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल बीसवीं शताब्दी के हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार हैं। उनका जन्म बस्ती, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनके द्वारा लिखी गई      सर्वाधिक महत्वपूर्ण पुस्तक है हिन्दी साहित्य का इतिहास, जिसके द्वारा आज भी काल निर्धारण एवं पाठ्यक्रम निर्माण में सहायता ली जाती है। 
प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण के बाद आयोजित गोष्ठी को क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी रामानन्द नन्हें, विनोद दूबे, दीपक गोंड आदि ने आचार्य शुक्ल के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला, कहा कि आचार्य शुक्ल ने  हिंदी, उर्दू, संस्कृत एवं अंग्रेजी के साहित्य का गहन अनुशीलन किया। उन्होंने ‘हिंदी शब्द सागर’ के साथ ‘नागरी प्रचारिणी पत्रिका’ का संपादन भी किया। सन् 1937 ई. में वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी-विभागाध्यक्ष नियुक्त हुए एवं इस पद पर रहते हुए ही सन् 1941 में उनकी हृदय गति रुक जाने से मृत्यु हो गई।
कार्यक्रम में रविकान्त दूबे, सुनील अग्रहरि, श्याम दूबे, राघवेन्द्र तिवारी, आशुतोष मिश्र, अमर सोनी, विक्की श्रीवास्तव, बालचंद शुक्ल, अमर निषाद, जगदीश चौधरी केे साथ ही मड़वानगर गांव के लोग उपस्थित रहे। 

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