ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। प्रशासन खुले में शौच से मुक्ति के लाख दावे करे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर आज भी बहुत साफ नहीं हुई है। ओडीएफ की सूची में जिन ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया, वहां 'राजनीति' प्रधानमंत्री की मंशा पर पानी फेर रही है। सैकड़ों गरीब परिवार ऐसे हैं जो पंचायत सचिव के कहने पर उधारी अथवा कर्ज लेकर शौचालय बनवा लिए लेकिन अब उनके सामने जटिल समस्या यह है कि सरकार द्वारा मिलने वाली धनराशि उन्हें नहीं मुहैया कराई जा रही है।
विकास खण्ड झंझरी की ग्राम पंचायत काजीदेवर इस लिहाज से वीआईपी माना जाता है कि ब्लाक प्रमुख रेखा मिश्रा यहां से क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) हैं। इसके बावजूद ओडीएफ के मामले में काजीदेवर की तस्वीर बहुत ही निराशाजनक है। यहां अब तक करीब 20% ही शौचालय का निर्माण कराया जा सका है।
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| गोविंद मौर्य |
इस ग्राम पंचायत के मजरा जुगेश्वरनाथ निवासी गोविंद मौर्य का कहना है कि तीन माह पूर्व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने उसे शौचालय निर्माण कराने के लिए प्रेरित किया। अस्मर्थता व्यक्त करने पर उन्होंने कहा कि कर्ज-उधार लेकर बनवा लो बजट आते ही चेक काट दिया जाएगा।
यहीं के मनोज, पिन्टू, अमरीश व आशीष का भी कहना है कि पंचायत सचिव के आश्वासन पर हम लोगों ने कर्ज लेकर शौचालय बनवा लिया, लेकिन तीन माह हो गए सचिव द्वारा चेक नहीं दिया जा रहा है। इन ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के अड़ंगा डालने के कारण ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ओडीएफ के लिए शासन से मिलने वाली धनराशि 12000 रूपये का भुगतान नहीं कर रहे हैं। कहने पर वह टालमटोल करते हैं। ऐसे में कर्ज के बोझ तले दबे इन गरीब परिवारों के सामने मूल धन के साथ ही ब्याज अदा करने की विकराल समस्या खड़ी हो गई है।
इस ग्राम पंचायत के चैनवापुर, मोफिया, सैदवापुर में 22 ऐसे परिवार हैं जो ओडीएफ की सारी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, लेकिन प्रधानी चुनाव की राजनीति चेक उपलब्ध कराने में बाधा बनी हुई है। इससे सम्बंधित शिकायतें और शिफारिशें जिम्मेदारों के आफिस की शोभा बढ़ा रही हैं। इस बाबत ग्राम प्रधान गुड़िया से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो बताया गया कि वह करीब तीन माह से बाहर हैं। ग्राम विकास अधिकारी लाल बहादुर सिंह ने बताया कि अभी मुझे करीब दस दिन पहले ही चार्ज मिला है। दो-चार दिन बाद ही कुछ स्पष्ट रूप से बता पाऊंगा कि सूची में नाम आने तथा सारी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद लाभार्थियों को चेक मुहैया कराने में क्या अड़चन थी। किसलिए उन्हें सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली बारह हजार रूपये की धनराशि नहीं दी गई। यदि ऐसा है, तो यह गलत और नियम विरूद्ध है। लाभार्थियों को चेक उपलब्ध कराया जाएगा।
झंझरी ब्लाक के ही बिरवा बभनी, छाछपारा कानूनगो, चकसड़, कस्टुवा, सीहागांव, सिसवरिया समेत दर्जनभर से अधिक ग्राम पंचायतों में भी ओडीएफ की तस्वीर निराशाजनक है। इन ग्राम पंचायतों में भी प्रधानी चुनाव की राजनीति प्रधानमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर पूरी तरह हावी है।
झंझरी ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि आशीष मिश्र का कहना है कि ग्राम विकास अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों को निर्देश दिया जा चुका है कि खुले में शौच मुक्त करने की दिशा में ईमानदारी से प्रयास करें। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा भी सख्त चेतावनी दी जा चुकी है। इसमें लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




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