बाबा जुगेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में चल रही रामलीला के छठवें दिन हुआ धनुष यज्ञ का मंचन
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। आदर्श रामलीला समिति अयोध्या धाम द्वारा काजीदेवर के बाबा जुगेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में किए जा रहे रामलीला कार्यक्रम के छठवें दिन सीता स्वयंवर और धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। भगवान राम के धनुष तोड़ने पर जनकनन्दिनी सीता, राम के गले में जयमाल डालकर उनका वरण करतीं हैं। इस आनंदोत्सव के समय दर्शकों ने राम और सीता पर फूलों की वर्षा करते हुए जयकारे लगाए।
मोतीगंज क्षेत्र के काजीदेवर में स्थित बाबा जुगेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में विगत पांच दशक से अनवरत रामलीला कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। बाबा जुगेश्वरनाथ मंदिर सेवा ट्रस्ट द्वारा कराए जा रहे इस धार्मिक आयोजन का क्षेत्र की जनता के साथ ही दूर दराज के रामभक्तों द्वारा आनंद उठाया जाता है। गुरूवार की रात्रि रामलीला समिति द्वारा दिखाई गयी सीता स्वयंवर की लीला में देश भर के राजा, महाराजा, राजकुमार और योद्धा शामिल हुए। सभी ने शिव धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन वे इसे हिला तक नहीं सके। तभी लंका नरेश रावण भी पहुंंचा। वह बहस करने लगा, जिसे देख बाणासुर आ गया।
दोनों पराकर्मियों के मध्य काफी देर तक संवाद हुआ। अंत में महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से राम उठे और धनुष को उठा कर जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाने की कोशिश की धनुष टूट गया। धनुष टूटने और राम के गले में सीता के वरमाला डालते ही देवताओं ने फूलों की वर्षा की।
इसी बीच वहां परशुराम पहुंच गए। शिव धनुष टूटने से परशुराम अत्यंत क्राधित थे। परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए संवाद का भी लोगों ने आनंद लिया। अंत में राम की विनम्रता के आगे परशुराम नतमस्तक हो गए। रामलीला में धनुष यज्ञ की इस लीला को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुटी। यह प्रसंग इतना भावपूर्ण था कि दर्शक रामलीला खत्म होने तक जमे रहे।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सदानंद मिश्र, कोषाध्यक्ष कृष्णदेव तिवारी, रवि प्रकाश मिश्र, सच्चिदानंद मिश्र, पंडित राकेश दत्त शास्त्री, अमृतलाल मिश्र आदि ने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी कलाकारों का सधन्यवाद किया।



एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ