शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़। ..... जुल्मों, सितम फरेबों फसादात के लिए, मशहूर है वो अपनी करामात के लिए। देश के ख्यातिप्राप्ति कवि अनुज नागेंद्र की सियासियों पर सलीके से वार को लिये उक्त पंक्तियों को मिली श्रोताओं की तालियों की गडगडाहट के साथ कटरा मेदनीगंज मे आयोजित मुशायरे मे कौमी इक्जहदी की आवाज बुलंद नजर आई।
असगर भुसावली की पंक्तियां- जिनको कांधे पे लिये फिरता था पहले नाज से, जिंदगी मेरी उन्हीं बच्चो पे भारी हो गयी को भी खूब दाद मिली। मुशायरे मे नासिर जौनपुरी ने सुनाया- हिचकियां रात दर्द तन्हाई, आ भी जाओ तसल्लियां दे दो को भी श्रोताओं ने जमकर पसंद किया। संचालन कर रहे खुर्शीद अंबर का भी अंदाज खूब जमा नजर आया- तमाम उम्र किताबों मे सर्फ की मैने, निचोड़ दी कहां आंखो को मैनें।
राष्ट्रीय कवि राजमूर्ति सौरभ ने अमीरजादो की घेराबंदी करते हुये पढ़ा- ये रोटी कितने मेहनत से किस परेशानी से मिलती है, वो क्या जानें जिन्हें हर चीज आसानी से मिलती है। इसके अलावा कासिम हुनर, अफजल इलाहाबादी, दर्द आयमी, आजाद प्रतापगढ़ी, दिलकश सुल्तानपुरी, जफर, रौनक प्रतापगढ़ व आफताब जौनपुरी ने भी अपने बेहतरीन कलाम पेश किये। अध्यक्षता हकीम मो. इरशाद ने की।
बतौर मुख्यअतिथि पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने कहा कि कवि और शायर समाज को सही गलत का मतलब समझाया करता है। उन्होनें कहा कि शायरी और कविता समाज को सही राह पर दिखाया करती है। आयोजन मे महशाद अली, मुख्तार अहमद खॉन, गुडडू, मौलाना अब्दुल वाहिद आदि रहे। संयोजन अब्दुल हकीम अंसारी व डा. मो. इमरान ने किया।


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