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केवल मंदिर निर्माण से देश का भला असंभव : प्रेमभूषण महाराज










ए. आर. उस्मानी / अजीज हसन सिद्दीकी
 गोण्डा। इटियाथोक क्षेत्र के ग्राम दौदापुर में चल रही श्री राम कथा के सातवें दिन पूज्य संत प्रेमभूषण जी महाराज ने विद्यार्थियों के लिए संदेश देते हुए कहा कि सूचना देना और आज्ञा लेना दोनों में अंतर है। आज के विद्यार्थी अपने मां बाप को सूचना देते हैं, जो सही नहीं है। उन्हें अपने घर में बड़ों से कोई काम से जाने या कुछ करने की आज्ञा लेनी चाहिए।

    शनिवार की कथा में श्री महराज ने प्रभु राम के वन जाने से चक्रवर्ती राजा दशरथ के दुखी होने व उससे व्यथित होकर प्राण छोड़ देने की मार्मिक कथा का उपस्थित लोगों को रसपान कराया। सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग में बैठने से कौआ भी मीठा बोलने लग जाता है। बगुला भी हंस हो जाता है। हमें आपको तो मानव का शरीर मिला है। महाराज ने अपने मधुर संगीत में कहा कि, देखी अजब निराली महिमा, सत्संग की, जिस पर लोग मुग्ध हो गए। जीवन में निरंतर सत्संग उपस्थित रहना चाहिए।





 अगर इसका रंग हमारे जीवन मे चढ़ जाए तो हम कुसंगत से बच जाते हैं। राम मंदिर को लेकर कहा कि अयोध्या में मंदिर का निर्माण हो इसे मैं भी चाहता हूं, परंतु सबसे पहले ये सोच होनी चाहिए कि भारत जितना विकास करेगा, उससे उतना ही देश का मान बढ़ेगा। केवल मंदिर के ही निर्माण होने से देश का भला नहीं हो सकता। श्री महराज ने कथा में कहा कि सबसे अधिक विघटन सनातन धर्म में ही है, क्योंकि इस धर्म के मानने वालों की संख्या सबसे अधिक है।
हम केवल अपने कर्तव्य को पूर्ण करें तो सत्संग अपने आप ही आ जाता है। उन्होंने कर्तव्य को ही धर्म बताया। कथा में श्री महाराज ने कहा कि जीवन भर में की गई कमाई भी किसी काम नहीं आती है, जबकि मानव जीवन में किये गए पुण्य बहुत ही काम आते हैं। धर्म के चार चरण को बताते हुए कहा कि सत्य, दया, तप और दान यही गुण हैं। यदि इसमें से कोई भी एक का हम अनुशरण कर लें, तो शेष अपने आप जीवन में आ जाएंगे। 







   श्री महराज ने कहा कि ब्राम्हण में ये सभी गुण समाहित करके ही भेजे जाते हैं, लेकिन वे यहाँ आकर इसका साथ छोड़ने में लग जाते हैं। राजा को धर्मशील होना चाहिए। यदि ये गुण राजा में आ जायें तो धरती स्वयं ही राजा की आवश्यकता पूर्ण कर देती है। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान व उनके परिवार के लोगों ने कथा व्यास व महराज जी की आरती उतारी। 






    कथा में बलरामपुर चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक एन.के. खेतान, अजय दूबे, मुख्य महाप्रबंधक चीनी मिल बभनान प्रवीन गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक चीनी मिल मनकापुर, ज्योतिषाचार्य राकेश तिवारी, ज्ञान प्रकाश शुक्ला, बार एसोसिएशन से के.के.मिश्रा, सुरेंद्र मिश्र, सत्यदेव त्रिपाठी, संतोष मणि अम्बरीष, पदुम नाथ, श्रीमती कल्प देवी, किशोरी देवी, रीता देवी, राहुल मणि तिवारी, प्रतिभा तिवारी, विश्वनाथ, विशाल हरीश, काशीनाथ, मनोज दूबे, विजय प्रताप दूबे, राजामुन्ना, सोनू मिश्रा, सुमन मिश्र, कमलकांत शुक्ल, अजय मिश्र, आरपी शुक्ल, परसुराम मिश्र, अमर सिंह, रामानंद तिवारी, बद्री प्रसाद तिवारी सहित हजारों कथा प्रेमी उपस्थित रहे।
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