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भक्त-भगवान को आपस में जोड़ने की डोर केवल गुरू के पास : संजय सांडिल्य








शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ़। मनुष्य को भक्ति रूपी डोर के जरिये भगवान से जोड़कर भवसागर से पार लगाने का काम सिर्फ गुरू ही कर सकता है। बिन गुरू के मनुष्य का जीवन दिशाहीन होता है और बिना दिशा के बार-बार संसार में आना-जाना अपनी शक्तियों को क्षीण करना ही है। उक्त बातें पट्टी क्षेत्र के विरौती गांव में तीर्थराज पाण्डेय के यहां चल रही श्रीमद भागवत ज्ञान कथा को श्रोताओं को सुनाते हुए राधा-कृष्ण गोपाल मंदिर के महंथ संजय शरण सांडिल्य ने कही। 







उन्होनें गुरू की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरू के पास ही भक्त को भगवान से जोड़ने की डोर है। मनुष्य को भक्ति रूपी डोर के जरिये भगवान से जोड़कर भवसागर से पार लगाने काम सिर्फ गुरू ही कर सकता है। हर दिन पतन की ओर बढ़ते इस संसार में बार-बार जन्म और मरण के बंधन से मुक्ति चाहिए तो भगवान श्रीकृष्ण ही उसका एक मात्र सहारा है। उन्होनें कहा कि बिना गुरू के मनुष्य का जीवन दिशा हीन होता है और बिना दिशा के बार-बार संसार में आना-जाना सिर्फ अपनी शक्तियों को क्षीण करना ही है। उन्होनें श्रोताओं से कहा कि अगर हमें जन्म बंधन से मुक्त पाकर परमसुख को प्राप्त करना है तो भगवान की शरण में जाना ही होगा।






 उन्होनें कहा कि भगवान की प्राप्ति दुर्लभ है लेकिन उससे भी दुर्लभ गुरू का मिलना है। जीवन में अगर गुरू की प्राप्ति हो गयी तो संसार से विरक्त निश्चित हो जायेगी। उन्होनें कहा कि भगवान श्रीकृष्ण परिपूर्णतम अवतार है। उन्होनें भागवत महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण के 22 अवतारों का वर्णन विस्तार से किया। इस अवसर पर दिनेश कुमार पाण्डेय अशोक कुमार पाण्डेय  मनोज कुमार पाण्डेय  राजीव कुमार  नागेन्द्र शर्मा, सूर्यनारायण ओझा आचार्य चन्द्रिका प्रसाद शुक्ला समेत तमाम भगवत प्रेमी मौजूद रहे।
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