ए. आर. उस्मानी / अजीज हसन सिद्दीकी
इटियाथोक, गोण्डा। मानस परिवार द्वारा इटियाथोक के दौदापुर में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन श्री प्रेम भूषण जी महाराज ने राम के राज्याभिषेक की कथा का वर्णन किया। कथा की शुरुआत करते हुए उन्होंने नारद मोह का वर्णन किया। महराज ने कहा कि सनातन धर्म की रीढ़ गृहस्थी है। हमारी संस्कृति बहुत में मातृ शक्ति का महत्ता बतायी। 'यत्र नारयंन्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता।' भारत अध्यात्म की धरती है। यहां भक्ति भाव की प्रधानता है।
महाराज जी ने भजन गाते हुए 'हरदम भक्तन ऊपरा प्रभु जी के नजरिया घूमेला।' कहा कि भगवान पर भरोसा करनी चाहिए और जब भरोसा हो जाय तो कभी अविश्वास नहीं करना चाहिए। सुग्रीव जी को भगवान पर भरोसा नहीं था, परंतु उनके मित्र हनुमान जी को भगवान राम पर पूरा भरोसा है। प्रेम भूषण जी ने कहा कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी संसाधन निःशुल्क हैं। वायु, पानी, प्रकाश सभी प्रकृति प्रदत्त हैं। उन्होंने बोतल बंद पानी को नुकसानदेय बताया और कहा कि इसे बंद कर देना चाहिए। राम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम ने वन में शोषितों, वंचितों को साथ लेकर अपना अभियान आगे बढ़ाया। भगवान का चरित्र महान है।
वह सभी को साथ लेकर चलते हैं और जो उनके शरण में आ जाता है उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि भगवान हमको नहीं भूलते हैं और हमको भगवान की याद आती नहीं है। जो पुण्यशाली होता है, वह भगवान की कथा सुनता है। पहले लोग संतों के आश्रम में जाया करते थे और अब कथा करने के लिए संत बुलाये जाते हैं। सबसे पहले त्रेता में कथा सुनाने के लिए शुकदेव जी को बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि हनुमानजी सुग्रीव का संदेश लेकर भगवान राम के पास आते हैं और कहते हैं कि सुग्रीव आपके दास हैं। हनुमानजी ने राम और लक्ष्मण को पीठ पर बैठाया और सुग्रीव के पास पहुंचा दिया।
आठवें दिन पूज्य संत प्रेमभूषण जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी कथा और अनेक भजन सुनाते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जैसा कोई राजा नहीं हुआ। श्रीराम ने अपनी प्रजा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। प्रभु को पाने के लिए समय, स्थान स्थिति नहीं बल्कि समर्पण होना चाहिए। कथा के दौरान महराज ने भगवान श्री राम के राजतिलक के प्रसंग को सुनाया और भगवान राम का राज्याभिषेक उत्सव भव्य रूप से मनाया गया।
कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान पर जिसका भरोसा है, उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता। राम नाम का स्मरण योग्य, उचित और व्यवहार में भी ठीक है। सुबह शाम इनके नाम लेने से सभी भवबाधा दूर होती है। नारी का निरादर नहीं होना चाहिए। घर में मातायें न हों तो सब कुछ अस्त व्यस्त हो जाता है। इनके न होने से घर में भगवान का पूजा पाठ भी बाधित हो जाता है। जीव पर भरोसा आप कितना करें? यह आप जानें, किन्तु जगदीश पर पूरा भरोसा करें। भगवान के सिवा किसी और पर भरोसा न करें, यह चलेगा, लेकिन यदि करें तो पूरा करें। बीच में अविश्वास के लिए कोई स्थान नहीं है। यह दुनियां भरोसे के बल पर ही चल रही है।
भगवान की कथा अपार और अनंत है। इसका कोई अंत नहीं है। प्रभु की कथा सुनकर हम धन्य हो जाते हैं और हमारी सभी बाधायें दूर हो जाती हैं। पहले लोग कथा सुनने संत, ऋषि, मुनि के आश्रम जाते थे। अब गांव, नगर में कथाएं नित होती हैं, फिर भी लोगों को सुनने का समय नहीं है। भगवान हमको भूलते नहीं और हमको उनकी याद आती नहीं। हम उनको दुःख में जरूर याद करते हैं, किन्तु सुख में नहीं।
इस मौके पर विधायक सुभाष त्रिपाठी, पूर्व विधायक तुलसीदास चंदानी, शेष नारायण मिश्र, राहुल शुक्ल, संतोष मणि तिवारी, अंबरीश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, काशी प्रसाद तिवारी, हरीश तिवारी, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, पदम नाथ, शीतला प्रसाद तिवारी, डॉक्टर विवेक मिश्र, राहुल मणि, संतोष मिश्र, कल्पना तिवारी, रुचि तिवारी, रीता देवी, शकुंतला, कमला मणि तिवारी, रघुवंश मणि, पंकज तिवारी, शेष नारायण मिश्र, श्रीकांत पांडेय, ज्योतिषाचार्य राकेश तिवारी सहित हजारों की संख्या में कथाप्रेमी श्रोता मौजूद रहे।





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