शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़। तहसील क्षेत्र के विरौती ग्रामसभा में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास संजय शरण सांडिल्य ने भगवान श्रीकृष्ण के नाम महिमा का वर्णन किया गया। कथा में व्यासपीठ ने बताया कि भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह के रूप में अवतरित हुए और हिरण्याकश्यप से प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की।
आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि देवताओं के कार्य को सिद्ध करने के लिए भगवान ने मोहिनी अवतार लेकर दैत्यों से अमृत की रक्षा की। गजेंद्र दृष्टांत का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जब मगरमच्छ ने अपने मुंह में गजेंद्र के पैर को पकड़ लिया तो गजेंद्र ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए भगवान को याद किया। गजेंद्र का उद्धार करने के लिए भगवान ने श्री हरि का अवतार लेकर तुरंत ही उसके प्राणों की रक्षा की। उन्होनें कहा कि कथा सुनना भी एक प्रकार का तप है। भोग विलास में रत विषयानुरागियों को भगवान की कोई भी कथा तृप्त नहीं कर सकती। भगवान को नारियल, फूल, फल, मेवा नहीं चाहिए।
वह तो प्रेम के भूंखे रहते है। उन्होनें कहा कि जीवन में विवेक को सदैव साथ रखना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार विवेक का प्रयोग न कर दूसरे को कष्ट देना महापाप है। उन्होनें कहा कि
भक्ति में ही वह शक्ति है जो प्रभु को अवतार लेने मजबूर कर देती है। इस अवसर पर यजमान तीर्थराज पाण्डेय, आचार्य चन्द्रिका प्रसाद शुक्ला, लवकुश महराज, रामराज ओझा, सूर्य नारायण ओझा, शीतला प्रसाद पाण्डेय, अशोक कुमार पाण्डेय, दिनेश कुमार पाण्डेय, राजीव कुमार पाण्डेय, नागेन्द्र शर्मा समेत तमाम भगवत प्रेमी मौजूद रहे।


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