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राजनीति ने समाज को बांटकर जातिवाद का जहर घोल दिया : प्रेमभूषण महराज











ए. आर. उस्मानी / अजीज हसन सिद्दीकी
 गोण्डा।इटियाथोक क्षेत्र के दौदापुर गांव में मानस परिवार द्वारा आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन पूज्य ​संत प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा अमृत समान है। यह कथा सुनने से हमारे सभी कष्ट दूर होते हैं। बच्चों के अंदर बड़ों के आदर-सम्मान की आदत डालें। बुजुर्गों और बड़ों का आदर-सम्मान करें। भक्ति को जितना बढ़ा सकें, बढ़ाएं। भक्ति से प्रेम बढ़ता है। प्रेम सच्चा और सहज होना चाहिए। इसमें मिलावट और बनावट न हो। हम प्रेम तो करें, किन्तु प्रेम का नाटक न करें।
     




  महराज ने कहा कि प्रवचनों में कुछ लोग कहते हैं की समाज बिगड़ा है, किन्तु यह उचित नहीं है। राजनीति को छोड़ दें तो समाज बहुत ही अच्छा है। राजनीति ने समाज को बाँटकर जातिवाद का जहर घोल दिया है। सभी के साथ हमें मिलजुल कर रहना चाहिए। किसी को दबाएं नहीं, चेताएं नहीं, बल्कि खुद चेतिए। समाज में केवल भक्ति प्रवाह बचा है, जिसे बढ़ाएं। हम उनके व उनके हम को बढ़ावा देना चाहिए। समाज विवादमुक्त हो तभी हमारा भला होगा। 




कर्म व कर्मकाण्ड करते समय भगवान पर भरोसा रखना चाहिए। भगवान को स्वार्थ का जरिया नहीं बनाना चाहिए। भगवान सभी जगह विराजमान हैं। उनको खोजने की दृष्टि होनी चाहिए। मन से जहाँ खोजेंगे वे मिल जाएंगे। आप घर, आफिस कहीं भी रहें, किन्तु मन भगवान में रहना चाहिए। हमारे अंदर ईमानदारी, वफादारी, सदाचार की सत्यनिष्ठा होनी चाहिए। भय के बिना अनुशाषित नहीं होया जा सकता है। जीवन और परिवार में अनुशासन बहुत जरुरी है, किन्तु यह खौफ, भय से युक्त न हो, बल्कि मुक्त हो।





     कथा के दौरान महराज ने देश में बढ़ती जाति व्यवस्था पर कटाक्ष किया। परिवार और समाज के लिए आदर्श जीवन की संकल्पना पर श्रोताओं से चर्चा की। कहा समाज में वंचितों और शोषितों का सम्मान करें। केवट और शबरी के प्रेम की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान सबके लिए सोचते हैं और उनका उद्धार करते हैं। कहा कि संग्रह उसका करिये जो स्थाई हो। उन्होंने श्रोताओं को भजन भी सुनाया। व्यक्ति को अच्छे मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। भगवान पर भरोसा करने वाले को कभी धोखा नहीं मिलता है। लंका में पूरे नगर को हनुमान जी ने जला दिया। केवल विभीषण का घर बचा। यह भगवान की लीला और कृपा है। 





कहा कि घर में वय और वृद्ध का सम्मान करें। भगवान को स्वार्थ का निमित्त न बनाया जाय। भगवान की कृपा पर कहा कि जो भगवान की भक्ति में लीन रहता है, उसके लिए संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। जो भगवान का भक्त है, उसे भगवान का दर्शन प्राप्त हो जाता है। राम कथा के बारे में बताया कि जिसको कथा में भरोसा होता है, उसका जरूर कल्याण होता है। मन का मिलना बहुत जरूरी है। परिवार में सबका मन एक दूसरे से मिलना चाहिए। भगवान से जब तक मन नहीं मिलेगा, तब तक भगवान की कृपा नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब सत्संग में रहें, तो मन भगवान में लगायें। भक्ति का अपना तंत्र है। 



इस तंत्र में लग जायेंगे तो फिर सब कुछ भूल जायेंगे। महापुरुष की सेवा से आशीर्वाद बहुत फलता है। आज की शिक्षा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज शिक्षित, अशिक्षित है। परीक्षा का अर्थ परीक्षा होना चाहिए, उसका मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। आज के परिवेश पर चर्चा करते हुए कहा कि सामाजिक परिवेश में ईमानदारी सत्य निष्ठा होनी चाहिए।





      कथा आयोजक पदुमनाथ तिवारी, कल्पना तिवारी, संतोष मणि तिवारी, रूचि तिवारी, हरीश तिवारी, विनय तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, रीता तिवारी, काशी प्रसाद तिवारी, पारसनाथ तिवारी, बद्री प्रसाद तिवारी, शकुंतला तिवारी, कमलामणि तिवारी, कंचन तिवारी, ज्ञान प्रकाश शुक्ल आदि मौजूद रहे।







भंडारे में हजारों लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद

सोमवार को कथा का अंतिम दिवस रहा। दोपहर दो बजे कथा समापन के तुरंत बाद विशाल भंडारा आयोजित किया गया। आयोजक संतोष तिवारी ने बताया कि भंडारा में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण, पेयजल, पार्किंग आदि व्यवस्था की खास जिम्मेदारी क्षेत्र के अनेक लोगों ने भली भाँती निभाई।
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