सुनील उपाध्याय
बस्ती । राष्ट्रीय एकता, विश्व शांति के परिप्रेक्ष्य में मानस प्रभा भवन में आयोजित श्रीराम चरित मानस सम्मेलन में जगद्गुरू रामानन्दचार्य ने कहा कि शांति हर व्यक्ति के भीतर है, जैसे मृग के अन्दर कस्तूरी होती है और वह उसी की खोज में भटकता रहता है। ठीक इसी तरह जीव भी शांति के लिये भटकता रहता है। विश्व का प्रत्येक मनुष्य यदि खुद को शांत कर ले तो विश्व शांति संभव है।
राम दिनेशाचार्य ने कहा भक्ति मार्ग में कदम-कदम पर परीक्षा है। भगवान शिव और बीर हनुमान की कृपा से श्रीराम से सम्बन्ध स्थापित होता है। भगवान शिव ने श्रीराम कथा का जो अमृत पृथ्वीवासियों को दिया वह जन मानस का कलुष धो रही है। धर्म हमारे जीवन को पवित्र करता है।
जगद्गुरू रामानुजाचार्य, पं. राघवाचार्य महाराज ने मानस सम्मेलन में कहा कि मनुष्य पहले स्वयं फिर परिवार के पालन पोषण व अंत समय में धन आदि के मोह में फंसा रहता है जबकि ईश्वर की कृपा जीव के मां के गर्भ में आते ही शुरू हो जाती है परन्तु जीव को अभिमान रहता है कि वही सब कुछ कर रहा है। अभिमान रहित जीव को ही परम सत्ता की अनुभूति होती है।
श्री हनुमान जी के चरित्र का वर्णन करते हुये पवनदास जी ने कहा कि हनुमान जी सदैव रामजी के संकट मोचक की भूमिका में ही रहे। जब लक्ष्मण जी को शक्ति व रात्रि भर का ही समय रह गया तो सबकी ओर देखने के बाद प्रभु ने हनुमान जी से ही आशा रखी और हनुमान जी संजीवनी लेकर पहुंचे।
शांति प्रिया जी व राधा भक्ति भारती ने कहा कि सनातन धर्म आदि से ही सशक्त व दृढ रहा है। सनातन धर्म को मिटाने की कोशिश करने वाले मिटते रहे परन्तु सनातन धर्म आज भी वैसा ही है और भविष्य में भी हिमालय की तरह अटल रहेगा। कार्यक्रम का संचालन आयोजक नरेन्द्रनाथ शुक्ल ने कहा। श्रीराम चरित मानस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रोताओं ने कथा रस का आनन्द लिया।


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