मृतक सीएमओ की पत्नी ने अधिकारियों पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
मौत के कारणों की गहनता से पड़ताल करे पुलिस : जिलाधिकारी
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। जनपद के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी की उन्हीं के घर में पेड़ से लटकती लाश मिलने से पूरे जिले में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही डीएम कैप्टन प्रभांंशु श्रीवास्तव, एसपी लल्लन सिंह के साथ ही आला पुलिस, प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने गहन जांच पड़ताल शुरू कर दी है, जबकि विभागीय अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। वहीं प्रभारी सीएमओ की पत्नी ने मौत की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों के सिर मढ़कर सनसनी फैला दी है। फिलहाल जिलाधिकारी ने इस घटना को बहुत ही गंभीरता से लेते हुए गहन पड़ताल की बात कही है।
बताते चलें कि जनपद के प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी / जिला कुष्ठ अधिकारी डा.सैय्यद गयासुल हसन (48 वर्ष ) की आज अलल सुबह उनके आवास विकास स्थित घर के लॉन में संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटकती लाश मिली, जिससे जिले में हड़कम्प मच गया। मृतक डॉक्टर की पत्नी हिना हसन की सूचना पर मौके पर पहुंच कर पुलिस ने शव को उतरवाया और आवश्यक लिखा पढ़ी कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। डॉक्टर गयासुल हसन की मौत की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी कैप्टन प्रभान्शु श्रीवास्तव भी घटनास्थल पर पहुंचे और गहरा दुख व्यक्त करते हुए गहन पड़ताल के निर्देश दिए। मौके पर फोरेंसिक टीम भी पहुंची और जांच में जुट गई। सीएमओ डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टर गयासुल हसन जिला कुष्ठ रोग अधिकारी के पद पर तैनात थे। पिछले 14 दिनों से वे प्रभारी सीएमओ थे। उन्होंने बताया कि डीएम के आदेश पर चिकित्सकों के तीन सदस्यीय टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया है।
सूत्रों की मानें तो डॉक्टर सैय्यद गयासुल हसन कई बार जान देने की कोशिश कर चुके थे। गत् वर्ष उन्होंने खुद को आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से जल गए थे। उस समय भी डॉक्टर हसन की बीवी व अन्य परिजनों ने व्यवस्था पर उंगली उठाते हुए कटघरे में खड़ा किया था, लेकिन इतनी गंभीर घटना को शासन, प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने नजरंदाज़ कर दिया था। उधर, डॉक्टर की पत्नी ने उच्चाधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। बताया जा रहा है कि बार बार तबादले व अन्य शोषण से डॉक्टर हसन काफी परेशान रहते थे। इलाहाबाद जिले के करैली स्कीम मोहल्ला निवासी डॉ. सैयद गयासुल हसन की पहली तैनाती बलरामपुर जिले के उतरौला तहसील में हुई।
इसके बाद उनका तबादला गोंडा हो गया। डॉ.हसन गोंडा के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र काजीदेवर, मुजेहना, रुपईडीह, बेलसर में अधीक्षक के पद पर तैनात रहे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी, जिला क्षय रोग अधिकारी जैसे पद पर वे तैनात रहे। वे इस समय जिला कुष्ठ अधिकारी के पद पर थे और प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) भी थे। डॉक्टर हसन की मौत (आत्महत्या) फिलहाल अबूझ पहेली बनी हुई है, लेकिन इसके पीछे साजिश की भी आशंका जताई जा रही है। अब सवाल यह है कि आखिर डॉक्टर हसन की मौत के पीछे कौन है.? कामों का बोझ, अधिकारियों द्वारा कथित रूप से किया जा रहा शारीरिक, मानसिक व आर्थिक शोषण या डिप्रेशन..?
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| फ़ाइल फोटो मृतक डिप्टी सीएमओ |
कई बार इस्तीफा भी दे चुके थे डॉक्टर हसन
प्रभारी सीएमओ डॉ. सैय्यद गयासुल हसन कार्य की अधिकता व अधिकारियों की कार्यशैली से ऊबकर चार बार इस्तीफा भी दे चुके थे, लेकिन अधिकारियों के मान मनौव्वल पर वे हर बार मान जाते थे। गत् वर्ष जब उन्होंने आग लगाकर आत्मदाह करने की कोशिश की थी, तब भी उन्होंने एक उच्चाधिकारी व लिपिक पर आरोप लगाते हुए इस्तीफा भेजा था, लेकिन उनके इस्तीफे पर कुछ विचार नहीं किया गया था।
सूत्र बताते हैं कि राजनीतिक प्रेशर, काम की अधिकता तथा अधिकारियों की तानाशाही और शोषण से डॉक्टर हसन डिप्रेशन में रहते थे। परिजनों के अनुसार, इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन हर स्तर पर उनकी शिकायत और पीड़ा की अनदेखी की गई।



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