एक शाम मां इंदर कौर के नाम' उन्वान से हुआ शानदार मुशायरा
ए. आर. उस्मानी / रियाजुद्दीन
गोण्डा। मुल्क में सुलग रही नफरत की आग को मुशायरो से निकलने वाली अदब और मोहब्बत की नदियों से बुझाया जा सकता है। यह बात नवाबगंज के थाना चौराहा स्थित सचदेवा एकेडमी में 'एक शाम मां इंदर कौर के नाम' से आयोजित शानदार मुशायरे को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और शदरे मुशायरा डॉक्टर रामेश्वर पांडेय ने कही।
इंदर कौर की 14 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित मुशायरे का आगाज स्वर्गीय मांं इंदर कौर के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया। संस्था के संस्थापक सरदार देवेंद्र सिंह सचदेवा अध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल नवाबगंज ने मुशायरे में आए हुए समस्त कवियों और शायरों को साल भेंटकर सम्मानित किया। पूरी रात एक के बाद एक शायर अपने अपने फन, अन्दाज और सुरीली आवाज में कलाम पेश कर श्रोताओं के दिलों पर राज करते रहे।
मुशायरे में शकील फूलपुरी ने पढ़ा कि 'बहुत ही खूबसूरत है मगर अच्छा नहीं लगता, नहीं है ओढ़नी सिर पर तो सिर अच्छा नहीं लगता, बहुत ही खूबसूरत मुस्कुराती बीवी हो घर में, अगर घर में नहीं है मां तो घर अच्छा नहीं लगता। प्रमोद द्विवेदी प्रमोद, लखनऊ ने पढ़ा बच्चा बच्चा जहां राष्ट्र रक्षार्थ सिद्ध हो एटम बम, उस भारत को दास बनाए बोलो इतनी किस में दम? कासिम गोंडवी ने पढ़ा 'बोझ बन जाऊंगा मैं अपने पराए के लिए, रूह जिस वक्त मेरे तन से निकल जाएगी।' नाजिया रिफअत कानपुर ने पढ़ा 'नाजिया मेरी आंखों में बस वो रहे, मुद्दतों से जो आता रहा ख्वाबों में, इतना कहना था वो सामने आ गया, ये करिश्मा हुआ देखते देखते।' विकास बौखल बाराबंकी ने पढ़ा 'किसी खंजर से न तलवार से जोड़ा जाए, सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए, ये किसी शख्स को दोबारा ना मिलने पाए, प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए।'
श्रोतागण पूरी रात आनंद की गंगा में डुबकी लगाते रहे। आयोजक कवि सम्मेलन सरदार सतपाल सिंह सचदेवा ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर सूर्य लाल दूबे, जगदम्बा प्रसाद गुप्ता, नबी बक्श कादरी, राणा जी, शाबान अली हनफी, अब्दुल वहीद एडवोकेट, पत्रकार राकेश सिंह, संजय प्रज्वलित, कस्बा इंंचार्ज विपिन सिंह खासतौर से मौजूद रहे।



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