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अयोध्या में विहिप ने 25 को भव्यायोजन हेतु किया भूमि पूजन











वासुदेव यादव
अयाेध्या। विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने आज पंचकाेसी परिक्रमा मार्ग स्थित बड़ा भक्तमाल की बगिया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहाकि सारी की सारी भूमि हमारे रामलला की है। क्याेंकि वह स्थान भगवान राम की जन्मभूमि है। जन्मभूमि कभी बदली नही जाती और न ही वह दाे-चार हाे सकती है।





 भगवान का जन्मस्थान एक है तथा उनके मन्दिर लाखों हाेते हैं। जन्मस्थान का विशेष महत्व रहता है, जिसकाे अदालत ने भी माना है कि यह स्थान हिन्दूओं के लिए स्पेशल सिगनी फिकेन्स का है। अदालत विशेष महत्व रखने वाले स्थान का विभाजन नही कर सकता है। इसलिए सम्पूर्ण भूमि रामलला की है। उन्होंने कहाकि आगामी 25 नवम्बर को इसी बाग में हाेने वाली धर्म सभा के लिए साेमवार काे भूमि-पूजन किया गया।






 इस सभा में शामिल हाेने के लिए लखनऊ, कानपुर, सीतापुर, हरदाेई, लखीमपुर और उत्तराखंड से लाखाें हिन्दू आ रहे हैं। श्री राय ने कहाकि सर्वाेच्च न्यायालय की उस बात से हिन्दू समाज बहुत आहत हुआ, जिसमें उसने कहा था कि राममन्दिर विषय से ज्यादा प्राथमिकताएं सर्वाेच्च न्यायालय के सामने हैं। इस एक वाक्य ने सारे देश को मथ कर रख दिया। इसके विराेध में कहीं गुस्सा आया और भिन्न-भिन्न प्रकार के शब्दों से लाेगाें ने अपने आक्राेश का प्रकटीकरण किया। सारे देश का हिन्दू समाज इस बात से एक साथ आक्राेशित और आल्हादित हुआ।







 उसी का परिणाम है यह धर्मसभा जाे अयाेध्या में हाेने जा रही। इसमें एक लाख लाेग सम्मिलित हाेंगे। पूरी दुनिया को हिन्दू समाज की प्राथमिकताओं काे समझना चाहिए। अयाेध्या का सन्त समाज व भक्त 500 वर्षाें से रामजन्मभूमि के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। ताला खुलने के बाद सारा देश राममन्दिर की लड़ाई में सम्मिलित हाे गया। तीन लाख गांव रामजन्मभूमि के साथ जुड़े तथा कराेड़ाे घराें तक मन्दिर का प्रारूप पहुंचाया गया। इसके अलावा राममन्दिर में लगने वाले पत्थर आधे से ज्यादा तराशे जा चुके हैं। विहिप उपाध्यक्ष ने कहाकि सन् 1885 में राममन्दिर के लिए पहला वाद चला था। आजादी के बाद 1950 से इसके लिए मुकदमें चलने लगे और 15 सालाें तक उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्ड पीठ में मुकदमा चला। इसमें पीठ ने फैसला भी दिया। जहां वह तीन गुम्बद विराजमान थे। उसके नीचे विशाल मन्दिर था, जिसे ताेड़ा गया और उसके मलबे से वह तीन गुम्बद खड़े किए गए। इस तरह पन्द्रह वर्ष लग गए राममन्दिर का फैसला आने में। उच्च न्यायालय काे लिखना ही पड़ा कि यह स्थान भगवान राम की जन्मभूमि है।






 यहां मन्दिर था, जिसे ताेड़ा गया। श्री राय ने कहाकि लेकिन उच्च न्यायालय के एक निर्णय से यह समाज सहमत नही है। उसने भूमि का बंटवारा कर दिया। हमने ताे बंटवारे का मुकदमा ताे दायरे नही किया था। हम बंटवारे के विरुद्ध अपील में गए। सर्वाेच्च न्यायालय से न्याय करने की अपेक्षा हम लाेगाें की है। लेकिन वह भी न्याय करने से बच रहा है और राममन्दिर मामले काे आगे के लिए टाल रहा है। हम इस दुनिया को रामजन्मभूमि आन्दोलन में लुके-छिपे बाधा काे हटाने वाले लोगों काे हिन्दुस्तान की प्राथमिकताएं बताना और दिखाना चाहते हैं।








 उन्होंने कहाकि हम बताना चाहते हैं कि 30 दिन की तैयारी में एक लाख हिन्दू अयाेध्या आ सकता है। 5 लाख हिन्दू 9 दिसम्बर के दिन दिल्ली में आ सकते हैं। हम पांच सौ स्थानों पर सभाएं करेंगे। यह समाज साेया नही है और राममन्दिर का विषय समाप्त नही हुआ है। अब मान लिया जाए कि 6 दिसम्बर मर गया। एेसे लाेगाें काे हम आइना दिखाना चाहते है। इतना ही 25 नवम्बर काे हाेने वाली धर्म सभा का उद्देश्य है। एक सवाल के जवाब में चम्पत राय ने कहाकि मुझे अभी कल पता चल कि उद्धव ठाकरे का कार्यक्रम अयाेध्या में है और वह 25 नवम्बर को आ रहे हैं। उन्होंने कहाकि देश की रक्षा माेदी सरकार से ही हाेगी।








70 साल तक जिस विचार ने देश में राज किया। उसने देश को बरबाद कर दिया, जिसने देश काे अमेरिका, रूस का पिछलग्गू बनाने की कोशिश किया। प्रेसवार्ता में मुख्य रूप से दिगम्बर अखाड़ा म. सुरेश दास, अयाेध्या संत समिति अध्यक्ष महन्त कन्हैयादास रामायणी, महन्त सियाकिशाेरी शरण, बड़ाभक्तमाल के उत्तराधिकारी महन्त अवधेश दास, म. मनमाेहन दास, म.वैदेही वल्लभ शरण, म. करुणानिधान शरण, अधिकारी राजकुमार दास, म. रामकुमार दास, राजेन्द्र सिंह पंकज, पुरूषोत्तम नारायण, सांसद लल्लू सिंह, पूर्व विधायक अकबरपुर पवन पान्डेय, महापाैर ऋषिकेश उपाध्याय, विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा आदि माैजूद रहे।

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