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चिर निद्रा में लीन हुए अटल जी के साथी 89 वर्षीय रामसमुझ तिवारी









89 वर्ष में हुआ देहावसान, शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का लगा तांता
हमेशा के लिए खामोश हो गई इलाके की बेदाग सियासी शख्सियत





अजीज हसन सिद्दीकी
खरगूपुर, गोण्डा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेेेयी के सहयोगी रहे ग्राम सेवरहा निवासी पूर्व प्रधान 89 वर्षीय राम समुझ तिवारी उर्फ भुर्रे बाबा का बुधवार देर रात्रि हृदयगति रूकने से देहावसान हो गया। भुर्रे बाबा ब्रिटिश पीरियड में टामसन इन्टर कालेज गोण्डा से हाईस्कूल पास किए थे। वे राजनैतिक मामलों केे चाणक्य के नाम सेे विख्यात रहे। स्थानीय राजनीति में निर्विवाद फक्कड़ नेता के रूप में भी जाने जाते थे। सियासत की इस शख्सियत के हमेशा के लिए खामोश हो जाने से इलाके के लोगों और राजनीतिज्ञों को गहरा दुख पहुंचा है।





    पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई के राजनैतिक संघर्ष के दिनों में यहां इनका काफी सहयोग रहा। बताते हैं कि अटल जी जब इधर का रुख करते तो यहां के लोगों से अनाज के पयारी पर इनके साथ जाकर जनसंपर्क करते थे, जिससे लोग बिना कहे जुड़ते चले जाते थे। अटल जी से जुड़े तमाम वाक्या अक्सर इनसे लोग सुनते रहते थे। 




अटल जी के 1957 में जनसंघ से लोकसभा चुनाव के दौरान जब गोण्डा बलरामपुर संयुक्त रहा तो इन्होंने अटल जी के साथ काफी संघर्ष किया और मीलों पदयात्रा करते हुए उस दौर के लोकसभा के तमाम क्षेत्र में जनसंपर्क कर अटल जी के लिए एक मजबूत जनाधार खड़ा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। पूरे क्षेत्र में अपनी बेबाक पहचान, हंसमुख स्वभाव, सहयोगी विचारधारा व सबकी मदद करने के गुणों से रामसमुझ तिवारी हमेशा याद किये जाते रहेंगे।





 वे अपने सात भाइयों में सबसे छोटे थे। विगत लगभग तीन - चार वर्षों से खराब स्वास्थ्य के चलते वे सार्वजनिक व राजनैतिक जीवन से विरत थे। उनके पीछे एक पुत्र सुरेश तिवारी पूर्व प्रधान सेवरहा व पांच पुत्रियां हैं। अटल जी के साथी रामसमुझ तिवारी के आकस्मिक निधन से क्षेत्र के एक स्वस्थ राजनीतिक शख्सियत की समाप्ति हो गयी है।
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