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खोड़ारे थानाध्यक्ष ने एसडीएम के आदेश की उड़ाई धज्जियां








ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। न्यायालय का आदेश सर्वोपरि मानकर जहां जिले के आला अधिकारी उसकी गरिमा को बरकरार रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं, वहीं एक माननीय की 'कृपा' से थानाध्यक्षी कर रहे खोड़ारे थाने के एसएचओ बेअंदाज और बेलगाम हैं।






 उनके लिए न्यायालय का आदेश भी कोई मायने नहीं रखता है। कहते हैं कि सत्तापक्ष के एक माननीय की शह पर न्यायालय के आदेश को दरकिनार करने के साथ साथ एसडीएम के आदेश को भी ताक पर रखकर समाधान दिवस पर उनके सामने ही पीड़ित पर मुकदमा कायम करते हुए सीआरपीसी की धारा 151 के तहत पीड़ित का ही चालान कर दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि थाने पर बैठे एसडीएम मूक दर्शक बने रहे!





     मामला जनपद के थाना खोड़ारे का है, जहांं के निवासी जगदम्बा प्रसाद पुत्र राम अचरज ने एसडीएम मनकापुर को प्रार्थना पत्र देकर क्षेत्र के ही सुभाष यादव पर आरोप लगाया है कि उसकी भूमि गाटा संख्या 280 पर सत्तापक्ष के एक नेता व इलाकाई पुलिस की शह पर लेखपाल से मिलकर गलत सीमांकन करवाकर उस पर जबरन काबिज होना चाहता है, जबकि 17 अक्टूबर 2018 को न्यायालय द्वारा विपक्षी को उक्त भूमि पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद 30 नवंबर को पीड़ित ने एसडीएम मनकापुर को यथास्थिति बरकरार रखने हेतु एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसे देख एसडीएम ने एसएचओ खोड़ारे को यथास्थिति बरकरार रखने का लिखित रूप से आदेश दिया, लेकिन बेखौफ एसएचओ के सामने उनका आदेश शनिवार को समाधान दिवस के अवसर पर बौना साबित हुआ। 






पीड़ित जगदम्बा प्रसाद का कहना है कि जब वह 1 दिसंबर खोड़ारे थाने पर आयोजित समाधान दिवस पर अपने भतीजे गुलजार यादव के साथ पहुंचा तो एसएचओ इंद्रजीत सिंह यादव ने विपक्षियों का पक्ष लेते हुए उसे कहा कि उन लोगों का कहना है कि तुम्हारे पास जमीन के कागजात नहीं हैं।  इसलिए आप लोगों पर 419, 420 का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। मौके की नजाकत देखकर जगदम्बा  अपने भतीजे को वहांं छोड़कर अमीन का फोन आने पर उनके पास चला गया। पीड़ित जगदम्बा ने बताया कि कोतवाल ने एसडीएम के सामने ही उसके भतीजे को गालियां देकर उस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए सीआरपीसी की धारा 151 के तहत चालान कर दिया। यहांं हैरानी की बात यह है कि एसएचओ ने कानून को एसडीएम के सामने ही शर्मसार किया और वे खुली आंंखों से सब कुछ देखते हुए तमाशबीन बने रहे। अफसोस की बात तो यह है कि जब एसडीएम के सामने ही उनके आदेशों को अंगूठा दिखाकर खोड़ारे थाने के बेलगाम कोतवाल जैसे अधिकारी अपने रसूख का घृणित खेल खेलते रहेंगे, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा.? 






     पीड़ित का कहना है कि वह अब अपनी फरियाद लेकर जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक से मिलेगा। उसने उम्मीद जताई कि नये कप्तान से न्याय जरूर मिलेगा।
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