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राष्ट्रीय लोक अदालत में हुआ रिकॉर्ड 3872 वादों का निस्तारण










अखिलेश्वर तिवारी 
बलरामपुर ।। जिला मुख्यालय के दीवानी न्यायालय परिसर में आज राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण के अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश सर्वेश कुमार की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक किया गया । राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा तहसील विधिक सेवा समितियों द्वारा रिकार्ड 3872 वादों का निस्तारण कर बैंकों की ऋण वसूली व न्यायाधीशों द्वारा लगाए गए अर्थदंड के रूप में 63 लाख 41 हजार ₹840 वसूल किए गए ।






                     जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्रीपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण के अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश सर्वेश कुमार की अध्यक्षता आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड 3872 वादों का निस्तारण कर 63 लाख 41 हजार ₹840 वसूल किए गए । उन्होंने बताया कि जनपद न्यायाधीश सर्वेश कुमार द्वारा मोटर दुर्घटना प्रतिकार अधिनियम के तहत एक वाद का निस्तारण कर ₹3 लाख 90 हजार का प्रतिकर प्रमाण पत्र जारी किया गया । प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश राम सुलीन सिंह द्वारा एक फौजदारी वाद का निस्तारण कर एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया । 






द्वितीय अपर जनपद न्यायाधीश राजमणि द्वारा एक मोटर दुर्घटना प्रतिकार वाद का निस्तारण करते हुए 10 लाख रुपए का प्रतिकार प्रमाण पत्र जारी किया गया तथा एक फौजदारी वाद का निस्तारण करते हुए ₹1000 का अर्थदंड लगाया गया ।अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम द्रुतगामी न्यायालय विजय कुमार आजाद द्वारा 3 सिविल वादों का निस्तारण किया गया । अपर जनपद न्यायाधीश दितीय द्रुतगामी न्यायालय डॉ अमित वर्मा द्वारा एक फौजदारी वाद का निस्तारण कर ₹1000 अर्थदंड लगाया गया । प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय जमशेद अली द्वारा भरण पोषण एवं वैवाहिक मामलों के 3 वादों का निस्तारण किया गया । प्रथम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल सिंह द्वारा 237 वादों का निस्तारण कर ₹ 21 हजार 260 अर्थदंड लगाया गया ।






 सिविल जज सीनियर डिविजन संजय कुमार सिंह द्वारा 95 वादों का निस्तारण कर ₹4530 का अर्थदंड लगाया गया वहीं सिविल जज जूनियर डिविजन उतरौला शिवम द्वारा 188 फौजदारी तथा 17 सिविल वादों का निस्तारण कर ₹12550 का अर्थ दंड वसूल किया गया । सिविल जज जूनियर डिविजन आशीष पांडे द्वारा 7 फौजदारी एवं दो सिविल वादों का निस्तारण कर ₹900 अर्थदंड के रूप में लगाया गया । न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रीमती स्वाति चंद्रा द्वारा 95 वादों का निस्तारण कर ₹9980 अर्थदंड के रूप में लगाया गया । इसके अलावा तहसील विधिक सेवा समितियों द्वारा राजस्व के 379, फौजदारी के 332, प्रीलिटिगेशन स्तर पर 1701 वाद, बैंकों के 285, बिजली विभाग के 402 तथा वाणिज्य कर के 450 वादों का निस्तारण  किया गया ।





  राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक के ऋण वसूली व अर्थदंड के रूप रुप में कुल 63 लाख 41 हजार ₹840 वसूल किए गए । उन्होंने बताया कि लोक अदालत के दौरान वादों के निस्तारण में अधिवक्ताओं का भरपूर सहयोग मिला और लोक अदालत के क्रियाकलापों से वाद कारियों को काफी  आसानी भी हुई ।

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