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भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए भागवत को करें आत्मसात : आचार्य धराचार्य महाराज









पूरेईश्वर नाथ में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा
शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ़ ! जीव को जगदीश में समाहित करने के लिए भागवत का श्रवण जरूरी है। श्रीमद्भागवत भवसागर से जीव को तारकर श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन कराती है। भागवत को आत्मसात करने से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा हो सकती है। वसुधैव कुटुंबकम् की परिकल्पना भागवत को आत्मसात करने से ही साकार की जा सकती है।






 निष्काम कर्म, ज्ञान- साधना, सिद्धि, भक्ति, अनुग्रह, मर्यादा, निर्गुण- सगुण तथा व्यक्त- अव्यक्त रहस्यों से श्रीमद्भागवत जीव का परिचय कराती है। उक्त बातें  नगर से सटे पूरे ईश्वर नाथ में पंडित राम किशोर शुक्ल के यहां चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस बैकुंठ धाम प्रयागराज से पधारे कथावाचक आचार्य श्री धराचार्य महाराज जी ने कही !





उन्होंने सच्चे संत के लक्षणों से भी श्रद्धालुओं को अवगत कराते हुए कहा कि जिसकी शरण में जाने से शांति और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है वही सच्चा संत है। गुरु के चरण चिन्ह दहलीज पर लेना चाहिए, इससे सद्गुणों के साथ- साथ लक्ष्मी का आगमन होता है। भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं, वह हम सब के हृदय में मौजूद हैं।
अगर जरूरत है तो सिर्फ महसूस करने की और जिस दिन हमारा मन भगवान की सच्ची भक्ति में लग जाएगा उसी दिन से हमें भगवान की उपस्थिति महसूस होने लगेगी। भागवत कथा को मन, कर्म और वचन से श्रवण करना उसी सच्ची भक्ति का सबसे बड़ा मार्ग है। 






 इस दौरान उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के अवतरण पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहां कि भाद्रपद अष्टमी की घोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र  में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्री कृष्ण ने जन्म  लेकर  अनेक लीलाएं की !




 इस दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य परमानंद मिश्र राज शुक्ला प्रभाकर शुक्ला जगन्नाथ तिवारी हरेंद्र तिवारी दिनेश उपाध्याय धीरेंद्र तिवारी आर.पी.  सिंह  संतोष गुप्ता गायत्री प्रसाद शुक्ला संतोष तिवारी पप्पू सुनील अभिनेंद्र मनोज मिश्रा शिवेश शुक्ल संदीप धीरेंद्र शुक्ला अमरनाथ शुक्ला सोमनाथ शुक्ला आदि लोग रहे!

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