राजकुमार शर्मा
बहराइच: उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, मिहींपुरवा मुख्यायल सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयन्ती को किसान सम्मान दिवस के रूप में मनाया गया। उनके आदम कद प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पार्पण किया।
एडीओ एग्रीकल्चर निरंकार मिश्रा ने कहा कि किसानों को पारदर्शी किसान सेवा योजना के अंतर्गत पंजीकरण कराना चाहिए। 75 हजार रुपये वार्षिक आमदनी से कम आय वाले पंजीकृत किसानों को मुख्यमंत्री सर्वहित बीमा योजना अन्तर्गत 5 लाख रुपये का स्वतः बीमा होता है। बीमा आवरण मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 5 लाख, अर्ध को 2.5 लाख, कृत्रिम अंग की स्थिति में 1 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। पंजीकरण हेतु कृषक के खेत की खतौनी,आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छाया प्रति, जिसमें उसका खाता संख्या तथा आईएफसी कोड उल्लेखित हो, की आवश्यकता पड़ती है।
पंजीकृत किसानों को जिला उद्यान विभाग से फल, फूल और सब्जी के पौधें, पानी-पाइप आदि 90% अनुदान पर मिलते हैं।
भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कई तरीका अपनाया जा रहा है। किसान कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए अधिकतम ₹10 लाख तक का परियोजना राशि उत्पादक समूह को 40% अनुदान पर देय है। फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना पर कृषक समूह को 10 लाख रुपए तक राशि 80% अनुदान पर उपलब्ध है। वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापना के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम में अधिकतम ₹6000 अनुमान्य है।
उनके द्वारा मसरूम उत्पादन पर डेमो कराया गया।
ब्लॉक एंकर पर्सन, नंदकिशोर साह ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन आदि करना चाहिए। रेशम जैविक प्राकृतिक उत्पाद है। रेशम कीट द्वारा सहतूत, आसन एवं साल की पति खाकर रेशम का उत्पादन किया जाता है। दूध उत्पादन और जैविक खाद, सामूहिक कृषि यंत्रीकरण का प्रयोग करना चाहिए। उत्पादक समूह को वैज्ञानिक खेती करना चाहिए। बहुफसल पद्धति, फसल चक्र, मिश्रित फसल के साथ अन्य उद्यम भी अपनाना चाहिए। इससे ना सिर्फ किसानों को सतत आजीविका के लिए आय में वृद्धि होगी, बल्कि बाढ़, सूखा या अन्य किसी प्रकार की आपदा से सुरक्षा होती है। आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सहायक भी है।
जैविक खेती के मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संतुलन को कायम रखते हुए कम लागत वाली कृषि तकनीकी अपनाकर खेती करना है। किसानों की आर्थिक व्यवस्था में सुधार हो तथा किसान आत्मनिर्भर एवं हो सके। किसान जैविक खेती अपनाकर अपनी खेती की लागत को कम करते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। जैविक खेती से कृषि निवेश के मामले में आत्मनिर्भर होंगे। जैविक खाद, कीटनाशकों से फसल की सुरक्षा भी कर सकेंगे।
फसल सुरक्षा हेतु फसल चक्र बीज शोधन करना, नर्सरी को ऊंचाई पर लगाना, उचित दूरी पर पौधारोपण करना जरूरी होता है।
कृषि रक्षा रसायनों के प्रयोग के समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी होता है। घोल बनाते समय हाथों में दस्ताने, चेहरे पर मास्क, टोपी, पैंट- जूते से पूरे शरीर को ढककर रखना, खरपतवार और कीटनाशी के लिए अलग-अलग उपकरणों का प्रयोग में लाना, ध्यान देना चाहिए कि मुंह नाक कान आदि में न जाने पाए। स्प्रे पंप की बंद पाइप या नोजल को मुंह से नहीं फुकना, हवा के विपरीत दिशा में खड़े होकर छिड़काव नहीं करना चाहिए। प्रयोग किए हुए रसायन के खाली पैकेट को पानी के स्रोत से दूर जमीन में दबा देना चाहिए। छिड़काव के बाद खाने पीने से पूर्व हाथ को अच्छी तरह साबुन से धो लेना चाहिए।
समूह की महिलाओं को किसान पाठशाला की बुकलेट वितरित किया गया।
मौके पर कृषि सखी, सविता, कमलावती, सुशीला देवी, पशु सखी, सरिता देवी, हिरण पड़ी, आशा देवी, समुह सखी सहित बड़ी संख्या में समूह की महिलाएं उपस्थित रही।



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