अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर ।। महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं हैं, जरूरत है तो बस उन्हे अपने अंदर छिपी क्षमताओं को पहचानने की । आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है, आप सभी घर घर जाकर मलेरिया व टीबी जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव और इलाज के प्रति जन समुदाय को जागरूक करें जिससे अधिक से अधिक लोग स्वास्थ्य केन्द्रों पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का लाभ लेकर स्वस्थ हो सकें।
यह बातें आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. घनश्याम सिंह ने सीएमओ कार्यालय सभागर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आयोजित आशा प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं । सीएमओ ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि मरीज टीबी की औषधियां छोड़ छोड़कर या कम मात्रा में ना खाएं । इसके लिए सभी आशाएं अपनी निगरानी में टीबी के मरीजों को दवा खिलाएं जिससे यदि ऐसा ना हुआ तो मरीज में टीबी के कीटाणु जल्दी खत्म नहीं होंगें । प्रशिक्षण के दौरान डा. अवधेश चैधरी मेडिकल अफसर गैसड़ी ने आशा कार्यकर्ताओं को बताया कि टीबी के मरीज का इलाज पूरा करवानें वाली आशा कार्यकर्ता को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है ।
आशा को टीबी की दवा स्थानीय सीएचसी और पीएचसी पर मिलेगी जिसे ले जाकर वे मरीज को अपने सामने खिलाएंगी और जब मरीज के दवा का कोर्स पूरा हो जाएगा तो वे मरीज की जांच करवाने के लिए पुनः स्वास्थ्य केन्द्र पर लाएंगी । जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि आशा माड्यूल 6-7 के अन्तर्गत सीएमओ कार्यालय सभागार में तीसरे चरण का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकीं हैै । उन्होंने कहा कि प्रत्येक आशा को 30-30 के समूह में तीन बैच के माध्यम से लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान महिला हिंसा के प्रति महिलाओं को जागरूक कर बचाव, उपाय, रोकथाम, एकजुटता व गांवों में मुद्दों पर एकजुट होने के तरीकों व संक्रामक रोग जैसे मलेरिया और टीबी के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान नवनीत मिश्रा राजेन्द्र त्रिपाठी, आनंद त्रिपाठी, पंकज द्विवेदी, त्रिलोकीनाथ, विनय कुमार श्रीवास्तव ने भी आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया।


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