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गोण्डा:कहोबा पुलिस का सराहनीय कार्य, पानी में भीगकर कांप रहे किसानों की बचाई जान







 संवेदनशीलता के मिसाल बने कांस्टेबल राकेश को सैल्यूट
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। कहोबा चौकी पुलिस द्वारा किए गए एक कार्य की लोग सराहना कर रहे हैं। बताते हैं कि पिछले दिन हुई बरसात में दो किसान भीग गये, जिससे वे थरथर कांपने लगे। आधी रात को कांस्टेबल राकेश कन्नौजिया अपने सहयोगी किशन यादव के साथ गश्त पर निकले तो देखा कि चौकी के सामने ट्रैक्टर ट्रॉली पर  दो लोग बेसुध पड़े थरथर कांप रहे हैं। दोनों बारिश और ओलावृष्टि में भीग गये थे। यह देखकर कांस्टेबल राकेश से रहा न गया और वह दोनों को चौकी पर लाकर अपना कम्बल ओढ़ाते हुए गैस सिलेंडर जलाकर आग तपाया, तब जाकर दोनों की ठंडी दूर हुई और उनकी जान बची।
      





जिले के मोतीगंज थाने की कहोबा पुलिस चौकी का कांस्टेबल दो किसानों के लिए देवदूत बन गया, जब बजाज चीनी मिल कुंदरखी पर गन्ना बेचकर वापस घर जा रहे दो किसान बारिश और ओलावृष्टि से भीगकर बेसुध हो गये और ठंडक से थरथर कांपते हुए गोण्डा मनकापुर के किनारे कहोबा चौकी के सामने ट्रैक्टर ट्रॉली खड़ी करके उसी पर निढाल पड़े हुए थे। मध्य रात्रि को अपने सहयोगी के साथ गश्त पर निकले कांस्टेबल राकेश कन्नौजिया को दोनों दिखाए दिए। कांस्टेबल रूक कर उनसे जानकारी करनी चाही लेकिन ठण्डक से बेहाल दोनों किसान थरथर कांपते रहे और कोई जवाब नहीं दे सके। सिपाही दोनों किसानों को चौकी पर ले आया और गैस सिलेंडर जलाकर आग तपाया तथा अपना कम्बल ओढ़ाया, तब जाकर दोनों को ठंडक से निजात मिली और उनकी जान बची।






 इसके बाद सामान्य होने पर दोनों लोगों ने अपना नाम रिंकू शुक्ला पुत्र जगन्नाथ शूक्ला व गिरीश चन्द शुक्ला पुत्र राम गरीब शुक्ला निवासी ग्राम मिर्जापुर थाना वजीरगंज जनपद गोण्डा बताया। दोनों ने बताया कि हम लोग बजाज चीनी मिल पर गन्ना बेचने आए थे। बरसात और ओलावृष्टि से भीग गये थे। घर को जा रहे थे कि कहोबा चौकी के सामने पहुंचते ही ठंड से थरथर कांपने लगे और बेसुध हो गए और ट्रैक्टर पर ही गिर गए। किसानों ने कहा कि पुलिस हम लोगों के लिए देवदूत बनकर आ गई, अन्यथा ठंड से रातभर में तो मर ही जाते। दोनों को पुलिस चौकी पर ही रखा गया और सुबह आरक्षी राकेश कनौजिया ने चाय नाश्ता कर उन के घर भेज दिया।




    कहोबा पुलिस के इस कार्य की किसानों के साथ ही क्षेत्रीय जनता भी सराहना कर रही है। यही सच भी है। अमूमन संवेदनहीन कही जाने वाली खाकी का यह कार्य वास्तव में अनुकरणीय और सराहनीय है। कांस्टेबल राकेश कन्नौजिया और उनकी संवेदनशीलता को सैल्यूट.!
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