शत-शत तुम्हें नमन है,
शत-शत तुम्हें प्रणाम,
ऐ मेरे प्यारे वीर शहीदों,
ऐ मेरे वतन की शान,
शत-शत तुम्हें प्रणाम।।
कांप रही है रूह हमारी,
आंखों से लहू टपकता है,
दे-देकर तुम्हें श्रद्धांजलि,
दुखित हृदय अब फटता है,
सोच के उन परिवारजनों को,
सांसें मेरी सिसकती हैं,
क्या बीत रही है उन सब पर,
यह सोच के जान निकलती है,
वो देश के गद्दारों, शैतानों,
अब आयी तुम्हारी बारी है,
तुम लाख बचा लो खुद को,
अब हम में भड़की चिंगारी है,
तुम्हें ढूंढ-ढूंढ कर भूनेंगे,
तड़पा-तड़पा कर मारेंगे,
तुम भीख दया की मांगोगे,
जब मौत के घाट उतारेंगे,
उबल रहा है ये खून हमारा,
अब खैर नहीं है तुम्हारी,
वास्ता अपने वीर शहीदों का,
अब आ गयी तुम्हारी बारी,
अब आ गयी तुम्हारी बारी।।
शारदेय' सुषमा श्रीवास्तव
कानपुर, उत्तर प्रदेश


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