सदर एसडीएम की पोस्टिंग को लेकर भी सांसद-विधायक में खींचतान
जनता पर भारी पड़ रही दिग्गजों में खिंचीं तलवारें और रसूख की जोर आजमाइश
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक जोड़तोड़ और गुणा-भाग के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी जद्दोजहद और खींचतान शुरू है। जिले की वीआईपी मानी जाने वाली मनकापुर तहसील में उप जिलाधिकारी की तैनाती को लेकर कैबिनेट मंत्री तथा सांसद आमने-सामने बताए जाते हैं,
वहीं सदर एसडीएम की पोस्टिंग पर भी रार चल रही है। इसमें सांसद और क्षेत्रीय विधायक जोर आजमाइश में लगे हुए हैं। यही वजह है कि इन तहसीलों के एसडीएम का तबादला होने के बाद अब तक किसी की पोस्टिंग नहीं हो सकी है।
जिले की मनकापुर तहसील वीआईपी इसलिए मानी जाती है, क्योंकि गोण्डा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया का यह गृह क्षेत्र है। ऐसे में एसडीएम, पुलिस क्षेत्राधिकारी तथा कोतवाल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर वे अपने मनमाफिक अधिकारियों की तैनाती कराते हैं। चूंकि, लोकसभा चुनाव सिर पर है, इसलिए मनमाफिक अधिकारियों की चाहत और महत्वपूर्ण हो जाती है। मनकापुर में तैनात एसडीएम जगदीश सिंह का पिछले दिनों स्थानांतरण हो गया। वहीं जिले की महत्वपूर्ण सदर तहसील के एसडीएम एसएन तिवारी का भी तबादला कर दिया गया।
ऐसे में दोनों तहसीलें रिक्त चल रही हैं। आगामी लोकसभा चुनाव से सम्बंधित आवश्यक कार्यों के साथ ही जनता की समस्याएं भी पेंडिंग पड़ी हैं। दोनों तहसीलों में अब तक एसडीएम की तैनाती न किए जाने से फरियादी भी दर-दर भटकने को विवश हैं। राजस्व से सम्बंधित तमाम आवश्यक कार्य तथा फाइलें धूल फांक रही हैं।
सूत्रों के अनुसार गोण्डा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया मनकापुर में अपने मनमाफिक अधिकारी की एसडीएम पद पर तैनाती कराना चाहते हैं, जबकि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री वहां वीके प्रसाद की पोस्टिंग की पैरोकारी कर रहे हैं। ठीक इसी तरह जिले की महत्वपूर्ण सदर तहसील पर भी एसडीएम की तैनाती को लेकर खींचतान बताया जाता है।
सूत्रों के अनुसार यहां तैनात रहे एसएन तिवारी का स्थानांतरण कर दिया गया। वे सदर विधायक के खास माने जाते थे। अब सदर एसडीएम की तैनाती को लेकर सांसद कीर्तिवर्धन सिंंह और विधायक प्रतीक भूषण सिंह में भी खींचतान बताया जाता है। विधायक का कहना है कि चूंकि सदर तहसील उनके विधानसभा क्षेत्र में आती है, इसलिए यहां उनके मनमाफिक एसडीएम की पोस्टिंग होनी चाहिए, जबकि सांसद कीर्तिवर्धन सिंह लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपने 'खास' अधिकारी की तैनाती चाहते हैं।
फिलहाल एसडीएम की तैनाती को लेकर सत्तापक्ष के दिग्गजों में खिंचीं तलवारें और राजनीतिक रसूख की जोर आजमाइश आम जनता पर भारी पड़ रही है।


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