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कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन के साथ ग्रामीण स्वास्थ्य पोषण दिवस का हुआ आयोजन







अखिलेश्वर तिवारी 
बलरामपुर, ।। जिले में चल रहे पोषण पखवाड़े के नौवें दिन सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस का आयोजन व सैम मैम बच्चों का चिन्हांकन किया गया। इस दौरान सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्रामीणों सहित गर्भवती महिलाओं व बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया ।

                 


जिला कार्यक्रम अधिकारी सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि शनिवार को पोषण पखवाड़ा चार्ट के अनुसार प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र पर ग्रामीण स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया। इसके अन्र्तगत केन्द्र पर आने वाले सभी लोगों का वहां मौजूद एएनएम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हे दवा भी वितरित किया। केन्द्र पर गर्भवती महिलाओं के पेट, खून, यूरीन, ब्लड प्रेशर, वनज आदि की जांच की गई व उन्हे टीटी का टीका लगाया गया। 




गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियां वितरित कर सही तरीके से खाने की सलाह दी गई। सभी केन्द्रों पर वीएचएसएनडी के साथ साथ सैम व मैम बच्चों का चिन्हांकन भी किया गया।
एएनएम ने पांच साल तक के बच्चों के वजन, लम्बाई आदि के आधार पर लाल श्रेणी की अति कुपोषित, पीला श्रेणी के कुपोषित व हरे श्रेणी सामान्य बच्चों का चिन्हांकन किया। जांच के बाद करीब 200 बच्चे सैम व मैम श्रेणी के पाये गये।



 रेनू जायसवाल सीडीपीओ पचपेड़वा ने बताया कि ब्लाक के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों की आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से गांव में पोषण पखवारे के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है जिससे ग्रामीण अपने व अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर स्वास्थ्य व पोषण सेवाओं का लाभ ले सकें।

कैसे होती है सैम मैम बच्चों की पहचान

अति कुपोषित की पहचान माक-टेप्स (मिड अपर आर्म सरकमफेरेंस टेप्स) मध्य ऊपरी भुजा की नाप से होती है। यदि भुजा की माप 11.5 सेंटीमीटर है तो समझिये बच्चा अतिकुपोषित श्रेणी का है। यदि 11.5 सेंटीमीटर से 12.4 सेंटीमीटर है तो कुपोषित की श्रेणी में माना जाएगा और 12.5 सेंटीमीटर है तो वह सामान्य श्रेणी में माना जाएगा। दोनों पैरों में गडढे़ वाली सूजन के बच्चे भी अतिकुपोषित की श्रेणी में माने जाते हैं।

गांवों में नहीं लगे पोषण हाट

पोषण पखवाड़े के दौरान शनिवार को प्रत्येक ग्राम सभा में पोषण हाट लगाये जाने थे। शासन ने जिले के जिला पंचायत राज अधिकारी को गांव के किसानों के माध्यम से पोषण हाट लगाये जाने की जिम्मेदारी सौपीं थी लेकिन अधिकांश जगहों पर पोषण हाट नहीं लगाये गये। डीपीआरओ नरेश चंद्र ने बताया कि आचार संहिता लगने से पहले एडीओ पंचायत के माध्यम से सभी ग्राम प्रधानों को  पोषण हाट लगवाने के लिए निर्देशित किया गया था आचार संहिता लगने की वजह से लोग एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकते हैं। इसी वजह से कई स्थानों पर पोषण हाट नहीं लगाया जा सका।

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