ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। कहते हैं कि नटवरलालों की कमी नहीं है। चंद रूपयों की खातिर ये देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर सकते हैं। ऐसे ही एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सेना में नौकरी दिलाने वाले एक गिरोह के चार सदस्यों को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल, ग्राम प्रधान की मुहर व लेटरपैड बरामद किया गया है। वहीं फर्जी अभिलेखों के सहारे सेना में नौकरी पाने वाले दो युवक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं।
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब कुछ दिनों पूर्व आर्मी हेडक्वार्टर लखनऊ से जिले के खरगूपुर थानाध्यक्ष को सेना में नौकरी पा चुके अफजाल पुत्र इक़बाल व दीपक पुत्र बच्चू सिंह निवासीगण पिपरा भोदर थाना खरगूपुर के निवास के सत्यापन का पत्र मिला। खरगूपुर थानाध्यक्ष सन्तोष कुमार तिवारी को इस पत्र पर संदेह हुआ। इस पर उन्होंने थाने के सब इंस्पेक्टर डीपी गौतम को मौके पर जांंच के लिए भेजा। जांंच के दौरान दोनों के निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाये गए।
थानाध्यक्ष श्री तिवारी ने बताया कि इसके बाद ग्राम प्रधान इंद्रदेव पाण्डेय को विश्वास में लेकर आरोपियों के विरुद्ध जाल बिछाया गया। उन्होंने बताया कि दो दिन बाद ग्राम प्रधान के पास दो लोग आए, जिन्होंने अपना नाम पता रिजवान पुत्र जुल्फेकार निवासी ग्राम भदौरा कमालपुर थाना ककौड़ जिला बुलंदशहर व इकरार पुत्र इकबाल निवासी रामपुर शाहपुर थाना चंडौस जिला अलीगढ़ बताया। ग्राम प्रधान को अफजाल व दीपक के सत्यापन कराने के लिए प्रलोभन दिया गया। ग्राम प्रधान ने बताया कि कुछ समय बाद मुकेश तिवारी पुत्र मनमोहन निवासी पूरे बलदेव पंडित थाना परसपुर तथा आशुतोष पाण्डेय पुत्र मेवालाल निवासी पूरे पांडेय अंदुपुर थाना परसपुर भी पहुंचे और सत्यापन के लिए दबाव बनाने लगे। इसी बीच प्रधान ने पुलिस को फोन करके सारी जानकारी दे दी।
थानाध्यक्ष संतोष तिवारी, वरिष्ठ उपनिरीक्षक कन्हैया दीक्षित, सब इंस्पेक्टर धर्मराज, विजय यादव, आरक्षी शशि यादव, रविन्द्र मौर्य व शाकिर अली ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल मौके पर पहुंचकर चारों को दबोच लिया। इनके पास से तीन मोबाइल, एक लैपटॉप तथा ग्राम प्रधान पिपरा भोधर के नाम का लेटर पैड व मोहर बरामद हुआ है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बताया कि मुकेश तिवारी व आशुतोष पांडेय के लोकवाणी केंद्र से छह माह पूर्व निवास प्रमाण पत्र बनवाया गया था और वहीं आधार कार्ड भी बना था। उन्हीं प्रमाण पत्रों के सहारे उन लोगों ने सेना में नौकरी प्राप्त कर ली थी, जिसके सत्यापन के लिए वहांं गए थे। फर्जी निवास प्रमाण पत्र व आधार कार्ड के सहारे सेना में नौकरी पाने वाले आरोपी अफजाल व दीपक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं।


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