नगर पालिका गोण्डा में एक भी गौ आश्रय केन्द्र न बनने पर आयुक्त ने ईओ के खिलाफ कार्यवाही के लिए लिखा पत्र
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। गौ आश्रय केन्द्रों के निर्माण में युद्धस्तर पर तेजी लाई जाए तथा गौ आश्रय केन्द्रों की प्रगति की रोजाना रिपोर्ट सभी पशु चिकित्साधिकारी उन्हें व शासन को दें। इसके अलावा गोण्डा नगर पालिका परिषद क्षेत्र में अब तक एक भी गौ आश्रय केन्द्र न बनाए जाने पर अधिशासी अधिकारी नगर पालिका गोण्डा को कड़ी फटकार लगाते हुए जिलाधिकारी गोण्डा को आयुक्त ने पत्र लिखकर कार्यवाही की संस्तुति की है,
जबकि जनपद श्रावस्ती व बहराइच के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को गौ आश्रय केन्द्र के निर्माण कार्य में शानदार काम करने के लिए सम्मानित कर प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। यह निर्देश आयुक्त देवीपाटन मण्डल महेन्द्र कुमार ने कैम्प कार्यालय पर आयोजित गौ आश्रय केन्द्रों की मण्डलीय समीक्षा के दौरान की है।
आयुक्त ने मीटिंग में स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कहीं भी गौ आश्रय केन्द्र के निर्माण कार्य में कमीशन लेने या देने की बात अथवा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी किए जाने की शिकायत सामने आएगी तो निश्चित ही सम्बन्धित अधिकारी या कार्यदाई संस्था के लोग कतई बख्शे नहीं जाएंगे। वहीं गोण्डा नगर पालिका क्षेत्र में अब तक एक भी गौशाला न बनने पर आयुक्त ने ईओ नगर पालिका गोण्डा को तलब कर मीटिंग में कड़ी फटकार लगाई है और उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए डीएम गोण्डा को पत्र लिखा है।
समीक्षा में उपनिदेशक पशु देवीपाटन मण्डल डॉक्टर सादिक अली ने बताया कि देवीपाटन मण्डल के चारों जनपदों को मिलाकर 136 गौ शालाओं का निर्माण कार्य कराया जाना था जिसके सापेक्ष अब तक 72 गौ शालाएं बन गई हैं, जिनमें आवारा पशुओं को संरक्षित किया जा रहा है।
जनपद गोण्डा के ग्रामीण क्षेत्रों में 32 के सापेक्ष 07, श्रावस्ती में 20 के सापेक्ष 17, बहराइच में 31 के सापेक्ष 24 तथा जनपद बलरामपुर में 51 के सापेक्ष 25 गौ आश्रय केन्द्र चालू हो चुकेे हैं। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र में गोण्डा को छोड़कर श्रावस्ती में 3, बहराइच में 3 तथा बलरामपुर में 5 गौ शालाएं क्रियाशील हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देवीपाटन मण्डल में ग्रामीण क्षेत्र में अब तक 8081 आवारा पशुओं तथा शहरी क्षेत्र में 991 पशुओं को गौ शालाओं में संरक्षित किया गया है जिनमें से अकेले जनपद श्रावस्ती में 2403 पशुओं को पकड़कर गौ शालाओं में डाला गया है।
आयुक्त ने कहा कि ऐसे पशुु चिकित्साधिकारी जिन्होंने गौ शालाओं के निर्माण में शिथिलता बरती है उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए शासन को भेजा जाएगा। ज्ञात हुआ कि पशुओं की चारे की व्यवस्था के लिए शासन द्वारा प्रत्येक जनपद को एक करोड़ रूपए की धनराशि प्रदान कर दी गई है। इसलिए सभी लोग गौ आश्रय केन्द्रों का भौतिक सत्यापन कर सूची दो दिन के अन्दर उन्हें उपलब्ध करा दें। इसके अलावा रोजाना व्यय की भी रिपोर्ट उन्हें दी जाए। उन्होंने यह भी अपील की कि लोग अपने मवेशियों को खुला न छोड़ें और अपने पास रखकर उनके चारा-पानी आदि की व्यवस्था स्वयं करें जिससे किसानों की फसलें बर्बाद न हों। उन्होंने निर्देश दिए कि ज्यादा से ज्यादा काम मनरेगा से ही कराया जाय और गौ आश्रय केन्द्रों के निर्माण में युद्धस्तर पर तेजी आनी चाहिए।
बैठक में गोण्डा, बलरामपुर, श्रावस्ती व बहहराइच के मुख्य चिकित्साधिकारी, चारों जनपदों के डीसी मनरेगा तथा कार्यदाई संस्था पैक्सफेड के अधिकारी उपस्थित रहे।


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