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प्रशासन की नाक के नीचे धधक रहीं जहरीली शराब की भट्ठियां






 अवैध शराब कारोबारियों को सेमरा चौकी पुलिस का संरक्षण
 निर्वाचन आयोग, मंडलायुक्त, डीआईजी व एसपी के आदेश भी बेअसर
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग के साथ ही मंडलायुक्त, डीआईजी, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक तक अवैध रूप से बनाई और बेची जा रही कच्ची जहरीली शराब पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाए जाने के सख्त फरमान जारी कर चुके हैं। 



बैठकों में भी आला अधिकारियों द्वारा इस बारे में बार-बार चेतावनी दी जाती रही है, लेकिन पुलिस अपनी मनमर्जी ही कर रही है। वह भी डंके की चोट पर। हद तो यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे ही खुलेआम पुलिस संरक्षण में कच्ची का कारोबार परवान चढ़ रहा है।
     

गोण्डा शहर में स्थित सेमराबाग पुलिस चौकी इन दिनों अवैध रूप से बनाई और बेची जा रही कच्ची जहरीली शराब को लेकर सुर्खियों में है। एक तरफ आदर्श चुनाव आचार संहिता लगी है, वहीं दूसरी तरफ नगर कोतवाली अंतर्गत सेमरा पुलिस चौकी क्षेत्र में अलग-अलग मजरों में लगभग 65 घरों में अवैध कच्ची शराब बनाने और बेचने का धंधा जोरशोर से चल रहा है। 


सूत्रों के अनुसार नगर क्षेत्र की सेमरा पुलिस चौकी के शेखापुर के पंडित पुरवा में 10 घरों में कच्ची शराब बनाई जाती है। सेमरा दम्मन के लगभग 25 घरों में तथा रानीजोत के 10 घरों में जहरीली शराब का निर्माण होता है। इसी तरह बलवंत पुरवा के 5 से 6 घरों में शराब का कारोबार परवान चढ़ रहा है। अवैध कच्ची शराब का गढ़ माने जाने वाले खैरी के मनसापुरी में लगभग 20 घरों में बेरोकटोक अवैध कच्ची जहरीली शराब बनाई व  बेची जाती है।
     

बताते चलें कि गत वर्ष सरकारी देसी शराब के ठेकेदार राम बाबू जायसवाल की हत्या कर दी गई थी, जिसमें मनसापुरी के कच्ची शराब कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के शामिल होने की बात सामने आई थी। दरअसल, वर्ष 2017 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश दिया गया था हाईवे या हाईवे से लगभग 500 मीटर की दूरी तक जो भी शराब की दुकानें हैं, उन्हें वहां से हटा दिया जाए। उसी परिप्रेक्ष्य में रामबाबू जायसवाल ने अपने शराब का ठेका साहेबगंज से हटाकर मनसापुरी में शिफ्ट कर लिया था।


 जब गांव में सरकारी देसी शराब का ठेका खुल गया तो वहां के अवैध कच्ची शराब के धंधेबाज आक्रोशित हो गए और इसी बीच रामबाबू जायसवाल पर हमला कर दिया गया, जिसमें उसकी जान चली गई। यह घटना तो महज बानगी है। कच्ची जहरीली शराब पीकर तमाम लोग असमय ही मौत के मुंह में समा चुके हैं। इसके बावजूद इलाकाई पुलिस को गरीबों की जन और धन हानि की चिंता नहीं है। वह तो सिर्फ मोटी कमाई में लगी हुई है। यही वजह है कि सेमरा पुलिस चौकी क्षेत्र में कच्ची का कारोबार दिनों दिन परवान चढ़ता जा रहा है।
      

बताया जाता है कि सेमरा चौकी क्षेत्र के लगभग 65 घरों में अवैध शराब बनाई जाती है। ऐसा भी नहीं है कि कच्ची शराब बनाने वाले घरों के बारे में पुलिस चौकी के लोगों को जानकारी न हो। सूत्रों की मानें तो प्रत्येक घर से ढाई हजार से लेकर तीन हजार रूपये तक प्रति माह वसूली की जाती है। इसके बदले में धड़ल्ले से सैकड़ों की संख्या में अवैध शराब की भट्ठियांं धधकती हैं। शासन या प्रशासन के फरमान पर सेमरा पुलिस अभियान के नाम पर महज दिखावे के लिए थोड़ा तोड़फोड़ कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है।
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