आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। हीट वेव (लू) के कारण शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है। जिससे मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए इससे बचाव बहुत ही जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी को अपनाकर इससे बचाव किया जा सकता है। उक्त आशय की जानकारी जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने दी।
उन्होंने गर्मी और लू से बचाव के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि अधिक से अधिक पानी पीये, पसीना सोखने वाले हल्के रंग व पतले वस्त्र ही पहने। धूप में जाने से बचे। यदि धूप में जाना जरूरी हो तो चश्में, छाते टोपी, व चप्पल आदि का प्रयोग करें। यदि आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ-पैरों को गीले कपड़े से ढकें रहे और यदि सम्भव हो तो छाते का उपयोग करें।
उन्होंने बताया कि यात्रा करते समय अपने साथ पर्याप्त मात्रा में पीने का स्वच्छ पानी रखें। ओ0आर0एस0, घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माड़) नीबू-पानी, छाछ आदि का उपयोग करें ताकि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सकें। हीट स्ट्रोक (लू) हीट रैश (घमौरिया), हीट कैप (मरोड़, ऐंठन) के मुख्य लक्षणों में शरीर में कमजोरी का होना, चक्कर आना, सिर में तेज दर्द, उबकाई का आना, पसीना आना, और कभी-कभी मूर्छा (बेहाशी) आना प्रमुख है। यदि मुर्छा या बीमारी का अनुभव करते है तो तुरन्त चिकित्सीय सलाह से उपचार लें।
उन्होंने बताया कि घरेलू पालतू जानवरों को छायादार स्थानों पर रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने दें। अपने घरों में ठंडा रखें, दरवाजे व खिड़कियों पर पर्दे लगवाना उचित होता है। सांयकाल व प्रातः के समय घर के दरवाजे व खिड़कियों पर पर्दे लगवाना उचित होता है। सायंकाल व प्रातः के समय घर के दरवाजे खिडकियों को खोलकर रखें ताकि कमरे ठंडे रहें। श्रमसाध्य कार्यो को ठंडे समय में करने का प्रयास करें।
उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर पीेने के ठंडे पानी की व्यवस्था करें। कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधानी करें। पखें, गीले, कपड़ों का उपयोग करे तथा स्नान करे। गर्भस्थ महिलाओं, छोटे शिशुओं व बड़ी उम्र के लोगो की विशेष देखभाल करें। उन्होंने कहा कि बच्चों व पालतू जानवरों को खड़ी कारो गाड़ियों में ना छोड़ें, यदि सम्भव हो तो दोपहर 11 बजे अपरान्ह 04 के मध्य धूप में निकलने से बचे। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपडें न पहनें। जब बाहर का तापमान अधिक हो तो श्रमसाध्य कार्य न करे। तभी लू से बचा जा सकता है।


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