अखिलेश्वर तिवारी/वेद मिश्र
बलरामपुर। एसएसबी 9वीं तथा 50वीं बटालियन द्वारा एसएसबी मुख्यालय पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें एसएसबी के जवानों ने काफी उत्साह के साथ रक्तदान किया। इस शिविर में लगभग 60 यूनिट रक्त संग्रह किया गया।
9वीं वाहिनी के उप कमांडेंट आशीष नैथानी ने खुद रक्तदान किया और जवानो को रक्तदान के लिए प्रेरित किया। 9वीं वाहिनी के कमांडेंट प्रदीप कुमार ने कहा कि प्रत्येक 6 माह में रक्त शिविर का एसएसबी कैम्प मे होता रहता है, रक्त दान महा दान है, जवानों द्वारा दान किया गया ब्लड जिला ब्लड बैंक में दिया जाता है जिससे जरूरत लोगो को इसका लाभ मिल सके।
रक्त दान करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी नही आती बल्कि नए रक्त का संचार होता है, उन्होंने कहा की इंडो- नेपाल सीमा पर भी जवानों द्वारा रक्त देकर लोगो की सहायता की जाती है। सशस्त्र सीमा बल हॉस्पिटल में तैनात सहायक कमांडेंट डॉक्टर तस्लीम डोल डॉल्टे ने बताया की ब्लड डोनेट करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी या समस्या नहीं आती है, बल्कि ब्लड का नया संचार हो जाता है। ब्लड डोनेट किए हुए व्यक्ति का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है हृदय तथा किडनी पर भी उसका अच्छा प्रभाव पड़ता है, उन्होंने कहा कि रक्तदान महादान है और इससे हम किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकते हैं, डोनेट किए हुए रक्त की पूर्ति 1 से 2 दिन के अंदर स्वत: हो जाती है।
रक्तदान करने के बाद डिप्टी कमांडेंट आशीष नैथानी ने बताया कि एसएसबी के जवान समय-समय पर रक्तदान करते रहते हैं, कभी मुख्यालय पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है तो कभी सरकारी तौर पर संयुक्त जिला चिकित्सालय में जा कर रक्तदान किया जाता है। रक्तदान कर चुके सभी जवानों ने एक स्वर में कहा कि रक्तदान करके हम किसी की जान बचा सकते हैं यह हमारे जीवन का एक सुनहरा अवसर होगा, हमें संतोष होगा कि हमारा रक्त किसी की जान बचाने में काम आया कई जवान तो ऐसे थे जिन्होंने तीन से चार बार रक्त दान किए हैं,
उनका संदेश स्पष्ट है कि रक्तदान से कोई कमजोरी नहीं होती है हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान अवश्य करना चाहिए। रक्तदान शिविर में लगभग 5 दर्जन सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने हिस्सा लिया जिसमें कई अधिकारी भी शामिल थे। सभी का मानना है कि ना मानव सेवा सबसे बड़ी सेवा है और रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है ।


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