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कालान्तर में यहाँ अंगुलिमाल का हुआ था उद्वार , जानिए बाबा करोहानाथ का इतिहास


राम गोपाल चौहान 
मनकापुर गोंडा: मनकापुर क्षेत्र के मछली बाजार में स्थित शिव मंदिर कालांतर से करोहानाथ के नाम से विख्यात है | क्राइम जंक्शन  टीम द्वारा बाबा करोहानाथ के इतिहास को खंगाला गया |

मनकापुर के मछली बाजार स्थित करोहानाथ मंदिर में दूर-दूर से शिव भक्त वर्षभर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मुंडन जैसे धार्मिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं | लेकिन वर्ष के मलमास,  सावन माह, शिवरात्रि, कजरी तीज, तेरस, एकादशी, सोमवार आदि दिवस में भोलेनाथ के भक्तों का तांता लगा रहता है |
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मंगलवार को सावन मास के तेरस के अवसर पर शिव भक्तों ने बाबा करोहानाथ को बिल्व पत्र, धतूरा, गांजा, भांग, दूध, शहद, चंदन, अक्षत, मदार  आदि से जलाभिषेक किया | मान्यता है कि सावन माह में शिव जी का पूजा करने से वर्षभर पूजा करने का फल प्राप्त होता है| यहां शिव भक्तों द्वारा मन्नते भी मांगी जाती हैं और पूरी होने पर शिव भक्तों द्वारा घंटा  बांधना, भगवत गीता का आयोजन करना, श्री सत्यनारायण व्रत कथा सुनना आदि किया जाता है |

 बाबा करोहानाथ मंदिर के पुजारी राजेंद्र  गिरी बताते हैं कि मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है | इसकी पहचान बौद्ध साहित्य मझिम निकाय के स्थविनीत सुख में वर्णित  तोरण वास्तु से की जाती है| जिस की स्थिति श्रावस्ती से साकेत जाने वाले मार्ग के चौथे पढ़ाव  के रूप में थी| यहां भगवान बुद्ध ने धर्म उपदेश दिया था| संयुक्त निकाय के थेरी गाथा सुत के अनुसार राजा बिंबिसार की रानी खेमा या क्षेमा ने भी यहां विहार किया था |

 इसके अतिरिक्त यह स्थल अंगुलिमाल के उद्वार से भी संबंधित किया जाता है| कालांतर में अशोक सम्राट ने यहां एक  स्तूप एवं विहार तथा उसके सामने स्तंभ का निर्माण करवाया था | इसी स्तंभ के भग्नावशेष को शिवलिंगके रूप में स्थापित कर गहड़वालराजा गोविंद चंद्र देव( 1110- 1156ई) ने यहां एक शिव मंदिर बनवाया | बाद में यहां पर मनकापुर के राजा रघुराज प्रताप सिंह ने 1904 में संगमरमर पत्थर से शिव मंदिर का निर्माण करवाया |
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