आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। किसानों के परेशानी का सबब बन चुके छुट्टा पशुओं के आतंक से किसानों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश की योगी सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में न्याय पंचायत स्तर पर गोवंश आश्रय स्थल का निर्माण कर छुट्टा पशुओं को आश्रय देने व किसानों को राहत पहुंचाने के लिए विगत दिनों फरमान जारी कर सभी जनपदों के आला अधिकारियों को निर्देशित किया गया था। आनन-फानन में पशु आश्रय स्थलों का निर्माण कार्य तो शुरू करा दिया गया,लेकिन निर्माण के वक्त यह ध्यान नहीं रखा गया कि कौन सा स्थान आश्रय स्थल के लिए बेहतर होगा।
जनपद में सेमरियावा ब्लॉक व साथा ब्लाक में आधा दर्जन पशु आश्रय केंद्र ऐसे स्थानों पर बना दिया गया। जहां बरसात शुरू होते ही पशु आश्रय स्थल डूब क्षेत्र में नजर आने लगे। जिससे छुट्टा पशुओं को आश्रय स्थलों में रखने की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। किसानों के लिए एक बार फ़िर छुट्टा पशु आफत का पर्याय बन गए। जिम्मेदारों द्वारा आश्रय स्थलों के निर्माण के समय स्थल का चयन करने में इतनी जल्दी बाजी थी, कि आमी और कठिनाइयां नदी के छोर पर ही आश्रय स्थल का निर्माण करा दिया गया। ऐसा ही नजारा सेमरियावा विकासखंड के ग्राम पंचायत उचेहरा कला में बनाए गए गोवंश आश्रय स्थल का देखने को मिला। जो संतकबीरनगर और बस्ती बॉर्डर पर स्थित कठिनाइया नदी के छोर पर ही जिम्मेदारों द्वारा निर्माण करा दिया गया।जहा बरसात शुरू होते ही इसमें पानी की धारा चलने लगी। जिम्मेदार निर्माण कार्य करा कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर चुके थे। उनको आश्रय स्थल के छुट्टा पशुओं को कहां रखा जाए इसकी कोई चिंता नहीं। आलम यह है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं का आतंक एक बार फिर से शुरू हो गया है। किसान आज भी अपनी फसल की रखवाली के लिए बरसात के मौसम में पहरेदारी करने को मजबूर है और जिम्मेदार आश्रय स्थलों का ढिंढोरा पीट अपनी पीठ थपथपा ने में लगे हुए हैं। वही मेहदावल तहसील के साथां विकासखंड के अगियौना ग्राम पंचायत में आमी नदी के छोर में ही जिम्मेदारों ने गोवंश आश्रय स्थल का निर्माण करा दिया गया। आज आलम यह है कि यहां लगभग 30 पशुओं को रखा गया था। उनको ग्राम पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र में आश्रय देना पड़ा। आखिर जब जिम्मेदार ही इतनी बड़ी गलतियां करेंगे तो, फिर छोटे अफसरों की बात ही क्या। एक बड़ा सवाल निर्माण कार्य में जो सरकारी धन खर्च हुआ उसकी बर्बादी का जिम्मेदार कौन.?

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