■ भरभरा गिरा छत,अभी तक नहीं लिया किसी ने सुधि
आलोक बर्नवाल
सन्तकबीरनगर। बघौली विकास खण्ड के अंतर्गत ग्रामसभा कदमा मे बरसात की कहर से तूफानी की जिंदगी में तूफान जैसा कहर टूट पड़ा है। बता दें कि लगभग 40 वर्ष पूर्व तूफानी के पिता के द्वारा मकान का निर्माण कराया गया था जो वर्तमान में पूरी तरीके से जर्जर हो चुका था पुश्तैनी मकान में लगभग 10 परिवार जीवन व्यतीत करते थे लेकिन आज ऐसी स्थिति आ गई है की तूफानी का पूरा परिवार एक त्रिपाल के सहारे जीवन व्यतीत कर रहा है और सकून से चैन की नींद नहीं आ रही आस-पड़ोस के लोगों के वहां तूफानी का पूरा परिवार रात व्यतीत कर रहा है। हाल ही में बरसात की शुरुआत हुई तो किसी के चेहरे पर मुस्कान तो किसी की मुस्कुराहट छीन गई। कदमा मैं तूफानी के बच्चे और बूढ़े मां-बाप मिलाकर कुल 10 सदस्य एक छत के नीचे जीवन यापन करते थे लेकिन बरसात की कहर ने उनके आशियाने को खत्म कर दिया है। सरकार दैवी आपदाओं के तहत तमाम योजनाएं संचालित कर लोगों को सुविधाएं मुहैया करा रही है लेकिन तूफानी की परिवार पर टूटे हुए कहर पर अभी तक किसी अधिकारी ने सुधि लेने तक नहीं पहुंचा। तूफानी का पूरा परिवार मजदूरी करके जीवन यापन करता है और अब ऐसी स्थिति में सकून से दो रोटी का भी इंतजाम तूफानी का परिवार नहीं कर पा रहा है। तूफानी का कहना है कि बरसात ने उसके आशियाने को खत्म कर दिया है अब सरकार से ही कुछ मदद मिलेगी तो कुछ हो सकता है क्योंकि हम मजदूर व्यक्ति हैं दो जून की रोटी सकून से नसीब नहीं होता तो छत कहां से बना पाएंगे। तूफानी के इस गुहार से अब देखना होगा कि सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ जिम्मेदार कब तक मुहैया करा पाएंगे।

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