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जान हथेली पर लेकर चलने को मजबूर पिपरी के ग्रामीण


■ जनप्रतिनिधियों और सरकारी तंत्र के उदासीनता के दंश को झेलने के लिए मजबूर है पिपरी के वासी

आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। जनपद के मेहदावल तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाली पिपरी बड़डाड ग्राम पंचायत के तीन राजस्व ग्रामों की स्थिति बरसात के मौसम इतनी दयनीय हो जाती है कि आम जनमानस से उनका संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। वर्ष 2013 में आई आमी नदी की तेज धार ने इस ग्राम पंचायत को बीएमसीटी मार्ग से जोड़ने वाली सड़क का लगभग डेढ़ सौ मीटर क्षेत्र अपनी धारा मे मिला लिया गया। लेकिन अभी तक उनके लिए आने-जाने की कोई भी व्यवस्था शासन प्रशासन या जनप्रतिनिधियों द्वारा नहीं की गई। जिसके कारण हर बरसात में यहां के ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नाव से के सहारे आना जाना पड़ता है। जनपद में जीवनदायिनी के नाम से प्रसिद्ध आमी नदी के छोर पर बसे होने के कारण इन राजस्व गांव में बरसात के मौसम में हमेशा खतरा बना रहता है। बरसात के समय ग्राम में स्थित प्राथमिक विद्यालय 3 माह से अधिक समय के लिए बंद हो जाते हैं तथा जिन लोगों ने अपने बच्चों को प्राइवेट विद्यालयों में डाला है वे लोग भी तीन माह तक शिक्षा से वंचित रहते हैं। या फिर नाव के सहारे नदी में आई धार को पार कर स्कूल जाने को विवश है। ग्रामीणों का कहना कि जनप्रतिनिधिय सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने हमारे गांव आते हैं जैसे ही चुनाव गुजर जाता है वह भी विलुप्त हो जाते हैं।हमारी सुनने वाला कोई नहीं विधायक सांसद व तहसील प्रशासन को हम लोगों द्वारा कई बार इस मामले से अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने हमारी सुधि लेना उचित नहीं समझा।अगर कोई बीमार पड़ जाता है तो दिन होने का इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि रात में ना से ले जाना खतरनाक है। कई लोगों की तो मौत तक हो जाती है सरकार का दावा सिर्फ कागजी है पिछले 7 वर्षों से हम लोगों को एक रास्ता तक नहीं मिल सका वहीं वही ग्रामीणों की धान की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है हालत यह है कि सैकड़ों एकड़ धान की फसल आमी नदी के बहाव में डूब चुका है आखिर पिपरी के लोगों ने कौन सा गुनाह किया है कि हर वर्ष हम सभी को बारिश के समय बेसहारा छोड़ दिया जाता है सरकार का गुणगान करने वाले कभी भी कोई अधिकारी कर्मचारी यहां नहीं आते और दिनों में तो पगडंडियों के सहारे आवागमन हो जाता है।लेकिन तेज धारा के आगोश में कौन आ जाए यह कहना मुमकिन नहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तहसील प्रशासन द्वारा एक छोटी सी नाव लगाकर अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर ली गई। आखिर कब सुनी जाएगी डेढ़ सौ आबादी के ग्रामीणों की फरियाद?

■ पशु पालको के सामने मवेशीयों चारे का संकट

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों कि सबसे बड़़ी पूंजी जमीन व उनके मवेसी ही होते है।ऐसे में ग्रामीणों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।बाढ़ की इस विभिषिका में पिपरी के निवासियों के सामने अपने अपने मवेशीयों के लिए चारा जुटाना एक बड़ी समस्या बन गयी है क्योंकि गाँव के चारो तरफ सिंर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा हैं।ग्रामीणों को अभी तक प्रशासन से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं उपलब्ध हो सकी है।

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