नवंबर 2018 में स्थानांतरण होने के बावजूद नहीं किया गया रिलीव
तारकोल वितरण में होने वाले करोड़ों के खेल को सफलता पूर्वक अंजाम देने में माहिर है राघवेंद्र
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। शासन का आदेश जिले के लोकनिर्माण विभाग में तैनात एक अवर अभियंता मानने को कतई तैयार नहीं है। उसके स्थानांतरण को आठ माह बीत गए लेकिन वह अंगद की तरह पैर जमाए हुए है और स्थानांतरित जिले में नहीं जाना चाहता है। इस संबंध में की गई तमाम लिखा पढ़ी तथा शिकायतें भी कूड़े की ढेर में गुम कर दी गयीं। अवर अभियंता के रसूख का आलम यह है कि विभाग के अधिशासी अभियंता तक मुंह खोलकर सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं।
बताते चलें कि शासन द्वारा 30 नवम्बर 2018 को प्रांतीय खण्ड लोकनिर्माण विभाग में तैनात अवर अभियंता राघवेंद्र प्रताप सिंह समेत प्रदेश के अन्य जिलों में तैनात 27 अवर अभियंताओं का स्थानांतरण किया गया था। इसी क्रम में प्रांतीय खण्ड गोण्डा से अवर अभियंता राघवेंद्र प्रताप को निर्माण खण्ड (प्र. प.) बलरामपुर स्थानांतरित किया गया, लेकिन अपने राजनीतिक रसूख के चलते वह गोण्डा में ही अंगद की तरह पैर जमाए हुए है। गोण्डा का मोह स्थानांतरित अवर अभियंता नहीं छोड़ पा रहा है। यही वजह है कि आठ माह बाद भी उसे रिलीव नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार अवर अभियंता राघवेंद्र सिंह लोकनिर्माण में स्टोर इंचार्ज का कार्यभार देख रहे हैं। बताते हैं कि सड़क निर्माण में प्रयोग किए जाने वाले तारकोल के वितरण में होने वाले करोड़ों के खेल को आसानी से अंजाम देने के लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा जान बूझकर उसे रिलीव नहीं किया जा रहा है। आठ महीने से लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा डंके की चोट पर शासन के आदेश का मखौल उड़ाया जा रहा है।
इस सम्बंध में प्रांतीय खण्ड लोकनिर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता देवेंद्र मणि ने स्वीकार किया कि अवर अभियंता राघवेंद्र का बलरामपुर स्थानांतरण नवंबर 2018 में ही किया गया है, लेकिन अब तक किन परिस्थितियों या किन कारणों से उन्हें रिलीव नहीं किया गया, इस सवाल का वे जवाब नहीं दे सके। इससे यह बात साफ हो जाती है कि स्थानांतरित अवर अभियंता को राजनीतिक संरक्षण के साथ ही विभागीय वरदहस्त भी प्राप्त है, जो शासन के आदेश पर भारी पड़ रहा है!


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