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वृंदावन की अधिष्ठात्री हैं राधा रानी सरकार :- रामानुज दास


शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ़ | सर्वोदय सद्भावना संस्थान द्वारा रामानुज आश्रम में रास रासेश्वरी राधा रानी सरकार का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूजन अर्चन करने के पश्चात ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि गर्ग संहिता और ब्रह्मवैवर्त पुराण तथा श्रीमद्देवी भागवत के अनुसार गोलोक धाम एवं राधा रानी के जीवन का विस्तृत वर्णन है। 
    भगवान श्री कृष्ण गोलोकधाम में एक बार राधा रानी से कहा पहले आप भूलोक  चलिए क्योंकि मैं अब वसुदेव और देवकी के घर अवतरित होने वाला हूं। राधा जी ने कहा मैं मृत्यु लोक मे नहीं जाना चाहती क्योंकि वहां पर ना तो शुक है और ना वहां पर वृंदावन है। भगवान श्री कृष्ण ने इसलिए शुकदेव जी को भेजा जो राधा रानी की गोद में खिला करते थे और लक्ष्मी जी के अंश से अवतरित तुलसी को भेजा। जिस कारण उसका नाम वृंदावन पड़ा।रावल नामक ग्राम में महाराज  वृषभानुऔर माता कीर्तिदा के यहां 5247 वर्ष पूर्व आप अवतरित हुई। भगवान श्री कृष्ण से 11 माह 15 दिन की बड़ी है। आप का स्वरूप बड़ा ही तेजोमय था लेकिन आप बोलती नहीं थी ।केवल नेत्र खुले रहते थे। जब भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लिया तो एक दिन राधा जी को लेकर बधाई देने के लिए पिता भगवान और माता कीर्तिदा नंद बाबा एवं जसोदा जी  के घर गए। भगवान श्री कृष्ण के पास पालने मैं राधा जी को लिटा दिया। उस समय नारद जी ने बड़ी ही सुंदर सुंदर स्तुति किया। जिस कारण से दोनों लोग एक दूसरे का हाथ पकड़कर के हंसने लगे ।गोलोक धाम में सदा आपका भगवान श्री कृष्ण के साथ वास रहता है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं तीन बार कहा है कि मैं ही श्रीकृष्ण हूं और मैं ही राधा हूं ।एक बार उद्धव जी जब लौटकर के गोपियों  से मिलकर आए तो उन्होंने अपने बगल में बैठी राधा जी का दर्शन कराया था। दूसरी बार रुकमणी जी पुष्कर क्षेत्र में पट रानियों के साथ राधा जी का दर्शन करने गयी और उन्हें गरम गरम दूध पिला दिया था। जिसके कारण भगवान श्री कृष्ण के पैरों में छाले पड़ गये थे तब भगवान ने रुकमणी जी से कहा था। मैं राधा के हृदय में वास करता हूं ।मैं ही कृष्ण हूं मैं ही राधा और तीसरी बार नारदजी से कहा था, जब राजा परीक्षित को शुकदेव जी ने श्रीमद्भागवत सुनाया । भगवान के विमान पर बैठकर पार्षदों सहित गोलोक धाम को गए तो भगवान श्री कृष्ण ने नारदजी से कहा था मैं ही कृष्ण हूं मैं ही राधा हूं।इसलिए यदि कृष्ण को पाना है तो पहले वृंदावन की अधिष्ठात्री देवी राधा जी की सेवा करनी चाहिए।राधा जी जिन भक्तों के लिए भगवान से कहती हैं कि यह आपका परम भक्त है ।भगवान उसको सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं। उक्त अवसर पर राधाबल्लभ संकीर्तन समिति के भक्तों द्वारा भजन कीर्तन किया गया।  लक्ष्मी मिश्रा, सीमा सिंह एवं शांति शुक्ला  को अंगवस्त्रम एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया गया ।कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिव प्रकाश मिश्रा सेनानी संतोष दुबे, नारायणी रामानुज दासी, मुरली केसरवानी, अशोक शर्मा, दिलीप शुक्ला अशोक कुमार दुबे प्रदीप शुक्ला, ज्ञानेश्वर रामानुज दास, राम शिरोमणि ओझा, अनीता पांडे, रेखा शुक्ला, विद्या सिंह, मीना सिंह, निधि सिंह, रवि मिश्रा, राजू शर्मा सुमन सिंह, दिनेश शर्मा,  राकेश सिंह सहित भारी संख्या में भक्तगण मौजूद उपस्थित रहे।

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