बनारसी चौधरी
बेलहर, सन्तकबीरनगर। कृष्ण-सुदामा की मित्रता। बेलहर। बिकास खण्ड बेलहर कला में चल रहे नौ दिवसीय गणेश पूजा के चौथे दिन कलाकारों द्वारा कृष्ण-सुदामा की मित्रता का वर्णन किया गया किसमे बहुत सुदामा बहुत गरीब ब्राह्मण थे अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास पैसे नहीं थे। सुदामा की पत्नी ने कहा हम भले ही भूखे रहें, लेकिन बच्चों का पेट तो भरना चाहिए न इतना बोलते-बोलते उसकी आँखों में आँसू आ गए। सुदामा को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा,पत्नी ने सुदामा से कहा आप कई बार कृष्ण की बात करते हो आपकी उनके साथ बहुत मित्रता है ऐसा कहते हो वे तो द्वारका के राजा हैं वहाँ क्यों नहीं जाते। सुदामा को पत्नी की बात सही लगी। सुदामा ने द्वारका जाने का तय किया। पत्नी से कहा ठीक है मैं कृष्ण के पास जाऊँगा। लेकिन उसके बच्चों के लिए क्या लेकर जाऊँ सुदामा की पत्नी पड़ोस में से पोहे ले आई। उसे फटे हुए कपडे में बांधकर उसकी पोटली बनाई। सुदामा उस पोटली को लेकर द्वारका जाने के लिए निकल पड़े। सुदामा पूछते-पूछते कृष्ण के महल तक पहुँचे। दरवान ने साधू जैसे लगने वाले सुदामा से पूछा यहाँ क्या काम है। सुदामा ने जवाब दिया मुझे कृष्ण से मिलना है वह मेरा मित्र है दरवान की बात सुनते ही कृष्ण खड़े हो गए और सुदामा से मिलने दौडे।सुदामा पोहे की पोटली छुपाने लगे, लेकिन कृष्ण ने खिंच ली कृष्ण ने उसमें से पोहे निकाले और खाते हुए बोले ऐसा अमृत जैसा स्वाद मुझे और किसी में नहीं मिला
उन्हें याद आया कि घर पर बच्चों को पूरा पेट भर खाना भी नहीं मिलता है। सुदामा वहाँ दो दिन रहे। वे कृष्ण के पास कुछ माँग नहीं सके। तीसरे दिन वापस घर जाने के लिए निकले। कृष्ण सुदामा के गले लगे और थोड़ी दूर तक छोड़ने गए। घर जाते हुए सुदामा को विचार आया घर पर पत्नी पूछेगी कि क्या लाए तो क्या जवाब दूँगा। सुदामा घर पहुँचे। वहाँ उन्हें अपनी झोपड़ी नज़र ही नहीं आई उतने में ही एक सुंदर घर में से उनकी पत्नी बाहर आई। उसने सुंदर कपड़े पहने थे। पत्नी ने सुदामा से कहा देखा कृष्ण का प्रताप हमारी गरीबी चली गई कृष्ण ने हमारे सारे दुःख दूर कर दिए सुदामा को कृष्ण का प्रेम याद आया। उनकी आँखों में खूशी के आँसू आ गए। इस अवसर पर श्री चन्द्र पांडेय,बेदप्रकास,सन्तोष पांडेय,मुकेश साहनी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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