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मोतीगंज के सीहागांव में मदरसे की जमीन पर भवन निर्माण नहीं होने दे रहे दरोगा 'यादवजी'


55 वर्षों से संचालित होता आ रहा है मदरसा, विपक्षी से साठगांठ का आरोप
बेवजह टांग अड़ा रहे हल्का दरोगा, गांव वालों में आक्रोश
ए. आर. उस्मानी
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                                                                                                                                                                    गोण्डा। शासन के साथ ही जिले के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक आरके नय्यर के आदेश-निर्देश भी मोतीगंज थाने में तैनात बेलगाम दरोगा के लिए कोई मायने नहीं रखते। यही वजह है कि करीब 55 वर्षों से संचालित मदरसे की जमीन पर भवन निर्माण करने से दरोगा द्वारा न सिर्फ रोक दिया गया, बल्कि दूसरे पक्ष का जबरन कब्जा करा देने की धमकी भी दी गई। दरोगा की इस कारस्तानी से गांव के मुस्लिम समाज के साथ ही हिंदुओं में भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि दरोगा यादवजी बेवजह टांग अड़ा रहे हैं। 
      
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मामला जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत सीहागांव के मजरे हतवा का है। करीब चार दशक तक यहां के प्रधान पद की नुमाइंदगी करने वाले पूर्व प्रधान फारूक ने बताया कि हतवा गांव में मस्जिद के पास स्थित आबादी की करीब डेढ़ बिसवा जमीन पर छप्पर रखकर मदरसा चलाया जा रहा था जिसमें गांव के सभी के बच्चे उर्दू-अरबी की तालीम हासिल करते थे। इस जमीन पर गांव के शफीक तथा उनके परिजनों का कब्जा था, जो आज भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि करीब दो-ढाई साल पहले किन्हीं कारणों से मदरसे का संचालन बंद हो गया। इस बीच गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा लोगों के सहयोग से अपनी जमीन में मदरसा बनवा दिया गया, जिसमें गांव के लड़के उर्दू और अरबी की तालीम हासिल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शफीक ने गांव वालों की सलाह पर पहले से संचालित मदरसे की जमीन पर भवन निर्माण कराकर गांव की बेटियों को उर्दू व अरबी की तालीम के साथ ही कक्षा पांच तक हिंदी और अंग्रेजी की भी शिक्षा मुहैया कराने के मकसद से 29 अक्टूबर को नींव की खुदाई का काम शुरू कराया जिस पर पड़ोसी मोहम्मद उमर व इकरामुद्दीन ने ऐतराज जताते हुए डायल 100 को बुला लिया।
     बताते हैं कि डायल 100 टीम ने मौके पर मौजूद लोगों के बयान लिए जिसमें सभी ने उस जगह पर 50-60 साल से मदरसा संचालित होने की तस्दीक की। इस पर टीम ने दोनों पक्षों को थाने पर जाने की सलाह दी। बताया जाता है कि मामला जब थाने पर पहुंचा तो हल्का दरोगा विनय कुमार यादव ने मदरसा पक्ष की बात सुनने के बजाय निर्माण कार्य रोक दिया और विपक्षी का जबरन कब्जा करा देने तक की धमकी दे डाली। यहां सवाल यह उठता है कि ज्यादातर जमीनी मामलों में राजस्व विभाग के सिर ठीकरा फोड़ने वाली पुलिस आखिर मदरसे के मामले में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रही है? मदरसा भवन निर्माण कराने वाले शफीक ने बताया कि मंगलवार को दरोगा विनय यादव ने मौके पर आकर जांच करने की बात कही थी लेकिन पूरा दिन बीत गया वह नहीं आए। इस बीच सुबह से शाम तक उन्हें दर्जनों बार फोन भी किया गया लेकिन वह रिसीव नहीं किए। आखिर में मौके पर मदरसे की तस्दीक के लिए बैठे लोग उठकर चले गए। इससे यह साफ जाहिर होता है कि दरोगा विनय यादव इस मामले में बेवजह टांग अड़ा रहे हैं, जबकि शासन के साथ ही पुलिस अधीक्षक का भी सख्त आदेश है कि जमीन के मामलों में पुलिस हस्तक्षेप नहीं करेगी।
        गांव वालों का आरोप है कि दरोगा विनय यादव विपक्षी से साठगांठ करके इस मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं, जबकि गांव के सभी लोग इस बात की गवाही दे रहे हैं कि उक्त जमीन पर वर्ष 1967-68 से मदरसा संचालित होता आ रहा है। दरोगा की बेजा दखलंदाजी से गांव वालों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार तक हल न निकलने पर पुलिस अधीक्षक से मिलकर सारे मामले से अवगत कराते हुए न्याय की मांग की जाएगी।

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