सुनील उपाध्याय
बस्ती जिले मे के दुबौलिया विकास खण्ड के शुकुलपुरा बाजार के वेदपुर ग्राम पंचायत में चल रहे है राम कथा के दूसरे दिन कथा वाचिका बाल व्यास- प्रज्ञा शुक्ला(प्रसून )ने कहा कि
राजा परीक्षित शुकदेव जी से पूछते है कि जिसकी मृत्यु निकट हो उसे मुक्त होने के लिए क्या करना चाहिए , तो जबाब दिया कि एकांत में परमात्मा का चिंतन किया जाय, संसार की चिंता को छोड़कर परमात्मा के चिंतन को बढ़ाओ एवं -
स्वास-स्वास पर कृष्ण भज, व्यर्थ स्वास जनि खोय।
ना जाने या स्वास की, आवन होय न होय।।
हर स्वास पर परमात्मा चिंतन मानव के लिए आवश्यक है क्योंकि मुक्त होने के लिए इससे बढ़कर दूसरा कोई उपाय नही।
अपनो दसों इंद्रियों को परमात्मा से जोड़ दिया जाय अपनी इंद्रियों को अपने बस में रखा जाय,
ब्रम्ह कहता है संसार मे मैं था, मैं ही हूँ और मैं ही रहूंगा, एवं जो चीज संसार मे नही है फिर भी दिखाई देती है अथवा जो होने पर भी दिखाई न देती वो मेरी माया है, तो आज का मानव उसी माया के चक्कर मे पड़कर स्वयं को भूल बैठा है या औऱ परमात्मा का चिंतन नही करता।
निष्कर्ष-
कर से करम करहु विधि नाना।
मन राखहु जहँ कृपा निधाना।।
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