अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर नगर के रमना पार्क स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता महाराजा बलरामपुर जयेंद्र प्रताप सिंह ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्रीमज्जगतगुरु स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य महाराज (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व वैदिक धर्म संघ, अयोध्या धाम) रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में बजरंग दल के प्रांत संयोजक महेश तिवारी तथा प्रो. रेखा विश्वकर्मा उपस्थित रहीं। 18 जनवरी को आयोजित हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। अतिथियों का स्वागत एमएलके पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जे.पी. पाण्डेय, व्यापार मंडल अध्यक्ष रमेश पाहवा, डॉ. राकेश चंद्रा, प्रवीण सिंह, दिव्य दर्शन तिवारी एवं डॉ. राजीव रंजन ने माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए बजरंग दल के प्रांत संयोजक महेश तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना दिवस पर शताब्दी वर्ष मना रहा है, जो हम सभी के लिए आत्मचिंतन का अवसर है। उन्होंने कहा कि हमें यह विचार करना होगा कि भारत पहले कैसा था और भविष्य में भारत को हिंदू राष्ट्र एवं विश्व गुरु बनाने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है। उन्होंने छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से समाज निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। महेश तिवारी ने भारत के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने अनेक आक्रमण झेले, लेकिन हमारे वीर नायकों ने सदैव मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने वास्तविक नायकों और आदर्शों को पहचानने की आवश्यकता है। भारत माता की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले महापुरुष ही हमारे सच्चे नायक हैं। उन्होंने गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह, वीर बंदा बैरागी एवं रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने पंच परिवर्तन और कुटुंब प्रबोधन पर विशेष बल देते हुए समाज में एकता और अनुशासन बनाए रखने की बात कही। मुख्य वक्ता स्वामी ओम प्रपन्नाचार्य महाराज ने अपने उद्बोधन में हिंदू जनमानस को जागृत करने का आह्वान किया। उन्होंने रामायण काल के उदाहरण देते हुए कैकेयी, शबरी और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के त्याग एवं आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को आपसी मतभेद भूलकर संगठित होना होगा और कुटुंब को जोड़कर समाज को सशक्त बनाना होगा। स्वामी प्रपन्नाचार्य ने पंच परिवर्तन को अपनाने, सामाजिक समरसता बढ़ाने तथा वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस मानवता का संविधान है, जो समस्त समाज के कल्याण का मार्ग दिखाता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन नीलमणि ने किया। इस दौरान विभाग संघ चालक सौम्या अग्रवाल, विभाग प्रचारक प्रवीण, जिला प्रचारक जितेंद्र कुमार, जिला कार्यवाह किरीट मणि, विभाग प्रचार प्रमुख मनीष, जिला प्रचार प्रमुख मोहनीश, साहित्य प्रसार प्रमुख भानु प्रकाश, संस्कार भारती जिलाध्यक्ष देव कुमार, डॉ के के सिंह, राम कृपाल शुक्ला, श्याम मनोहर तिवारी सहित बड़ी संख्या में हिंदू जनमानस उपस्थित रहे।
एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ