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BALRAMPUR...वनस्पति विज्ञान विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी

अखिलेश्वर तिवारी 
जनपद बलरामपुर में एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग, आई क्यू ए सी एवं सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में "जैव विविधता और नृजातीय वनस्पति विज्ञान पर्यावरण संरक्षण रणनीतियां, सांस्कृतिक विरासत और सतत उपयोग" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन सत्र का शुभारंभ बुधवार को हुआ। संगोष्ठी में वक्ताओं ने  पारंपरिक औषधीय प्रणाली एवं उसके महत्व पर विधिवत प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पतिशास्त्री एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रोफेसर एन के दूबे, कार्यक्रम अध्यक्ष प्रबंध समिति के सचिव कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य प्रो0 जे पी पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि वन विभाग के ACF मनोज कुमार व गोरखपुर विश्वविद्यालय के डॉ अशोक कुमार, मां गायत्री विद्यापीठ रिसिया बहराइच के प्राचार्य प्रो0 दिव्य दर्शन तिवारी, आई क्यू ए सी कोऑर्डिनेटर प्रो0 एस पी मिश्र, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान डॉ राजीव रंजन एवं आयोजन सचिव डॉ शिव महेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित एवं मां सरस्वती के
की प्रतिमा  पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया। इसके पश्चात मां सरस्वती की वंदना, महाविद्यालय के कुलगीत एवं स्वागत गीत के माध्यम से संगोष्ठी की औपचारिक शुरुआत हुई। संगोष्ठी में उपस्थित प्राध्यापकों ,प्रतिनिधियों व शोधार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो0 एन के दूबे ने कहा कि पारंपरिक औषधीय पौधों से बना एक पौधा (या हर्बल उपचार) वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक चमत्कारी और टिकाऊ दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, क्योंकि दुनिया भर में 80% आबादी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर निर्भर करती है। यह दृष्टिकोण न केवल सस्ती और सुलभ चिकित्सा प्रदान करता है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने में भी सहायक है। उन्होंने पौराणिक कथाओं का उदाहरण देते हुए भारत भूमि में कई हज़ारों साल पहले से ही उत्पन्न हो रही औषधीय पौधों के महत्व पर गहन प्रकाश डाला। तुलसी, पुनर्नवा, और शतावरी जैसे पौधे न केवल सामान्य बीमारियों का इलाज करते हैं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देते हैं। पारंपरिक जड़ी बूटियाँ एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भी प्रभावी विकल्प प्रदान करती हैं। कार्यक्रम अध्यक्ष महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव कर्नल वार्ष्णेय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती और हर्बल उत्पाद उद्योग ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा करते हैं।यह दृष्टिकोण स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करता है और उसे पीढ़ियों तक जीवित रखता है। प्राचार्य प्रो0 पाण्डेय ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों को अपने वन संपदा से परिचित कराना है । विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान डॉ राजीव रंजन व ACF मनोज कुमार ने सोहेलवा वन्य जीव के बारे में जानकारी दी।  संगोष्ठी के समन्वयक डॉ श्रवण कुमार ने थीम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला जबकि आयोजन सचिव डॉ शिव महेन्द्र सिंह एवं सह आयोजन सचिव राहुल कुमार ने अतिथियों का परिचय कराया। संचालन आई क्यू ए सी कोऑर्डिनेटर प्रो0 एस पी मिश्र ने किया। वरिष्ठ सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ जे पी तिवारी सहित सभी अतिथियों का स्वागत डॉ मोहम्मद अकमल, राहुल यादव व डॉ वीर प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य नियन्ता प्रो0 वीणा सिंह, प्रो0 मोहिउद्दीन अंसारी,प्रो0 अशोक कुमार, डॉ माणिक मोहन शुक्ल, डॉ राम आसरे गौतम,डॉ तारिक कबीर, डॉ सद्गुरु प्रकाश, डॉ ऋषि रंजन, डॉ सुनील कुमार, डॉ जितेन्द्र कुमार,डॉ राजन प्रताप, डॉ के के सिंह, डॉ एस के त्रिपाठी, डॉ राम रहीस, डॉ पंकज गुप्त, लेफ्टिनेंट डॉ देवेन्द्र कुमार चौहान सहित कई प्रदेशों के प्रोफेसर व शोधार्थी मौजूद रहे ।

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